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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - कितनी प्यारी लाइन है. र्हों में मंज़िल का ठिकाना नहीं था. ले गई भटक गए ज़िंदुगी उन हमें जाना नहीं था..!! रहों में जहाँ : apka 4) 0 कितनी प्यारी लाइन है. र्हों में मंज़िल का ठिकाना नहीं था. ले गई भटक गए ज़िंदुगी उन हमें जाना नहीं था..!! रहों में जहाँ : apka 4) 0 - ShareChat