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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ৫৫ आँखें भी खोलनी पडती है साहब f उजाले के केवल सूरज के निकलने से ही अंधेरा नही चला பள) ৫৫ आँखें भी खोलनी पडती है साहब f उजाले के केवल सूरज के निकलने से ही अंधेरा नही चला பள) - ShareChat