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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ये सुबह साँस लेगी और बादबाँ खुलेगा पलके उठा लो जानम के आसमाँ खुलेगा (Sachin Ganore) आँखों से नींद खोलो , दरिया रुके हुए है और पर्बतों पे कब से बादल झुके हुए है ये रात बंद हो तो दिन का समां खुलेगा गुलज़ार साहब ( वादा ) ये सुबह साँस लेगी और बादबाँ खुलेगा पलके उठा लो जानम के आसमाँ खुलेगा (Sachin Ganore) आँखों से नींद खोलो , दरिया रुके हुए है और पर्बतों पे कब से बादल झुके हुए है ये रात बंद हो तो दिन का समां खुलेगा गुलज़ार साहब ( वादा ) - ShareChat