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##नैतिक शिक्षा..कहानिया #नैतिक शिक्षा
#नैतिक शिक्षा..कहानिया - नकली नीलकंठ बरसात का मौसम था। एक मोर पंख फैलाकर नाच रहा था। एक नीलकंठ को उसके सुंदर पंख बहुत पसंद आए। उसने अगर मेरे पास भी ऐसे पंख होते तो मैं भी मोर जैसा सोचा, उसने मोर के गिरे हुए पंख इकट्ठा लगता। किए और उन्हें अपनी पूँछ में बाँध लिया। अब वह मोर जैसा दिखाई देने लगा। एक दिन वह मोरों के झुंड में पहुँचा। "3ম২ নুস সীয ৪ী নী ৪সাহী ন২৪ मोरों ने उससे कहा, नाचकर दिखाओ।" जैसे ही वह नाचने लगा, उसके पंख गिरने लगे। मोर समझ गए कि वह नकली है और उन्होंने उसे भगा दिया। जब वह अपने नीलकंठ साथियों के पास लौटा,तो उन्होंने भी उसकी सच्चाई जान ली और उसे वहाँ से भी भगा दिया। शिक्षा दिखावा नहीं अपनी सच्ची पहचान ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। नकली नीलकंठ बरसात का मौसम था। एक मोर पंख फैलाकर नाच रहा था। एक नीलकंठ को उसके सुंदर पंख बहुत पसंद आए। उसने अगर मेरे पास भी ऐसे पंख होते तो मैं भी मोर जैसा सोचा, उसने मोर के गिरे हुए पंख इकट्ठा लगता। किए और उन्हें अपनी पूँछ में बाँध लिया। अब वह मोर जैसा दिखाई देने लगा। एक दिन वह मोरों के झुंड में पहुँचा। "3ম২ নুস সীয ৪ী নী ৪সাহী ন২৪ मोरों ने उससे कहा, नाचकर दिखाओ।" जैसे ही वह नाचने लगा, उसके पंख गिरने लगे। मोर समझ गए कि वह नकली है और उन्होंने उसे भगा दिया। जब वह अपने नीलकंठ साथियों के पास लौटा,तो उन्होंने भी उसकी सच्चाई जान ली और उसे वहाँ से भी भगा दिया। शिक्षा दिखावा नहीं अपनी सच्ची पहचान ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। - ShareChat