ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मैं शबनम दिल मोम और धूप में बैठा हुआ हूँ मैं कुछ देर बाद राख मिलेगी UగT নুদ্ক लौ बन के इस चराग़ से लिपटा हुआ हूँ मैं से लिए हुए दो सख़्त खुश्क़ रोटियां कब पानी के इन्तिज़ार में बैठा हुआ हूँ मैं लाठी उठा के घाट पे जाने लगे हिरन में पैदा हुआ हूँ मैं कैसे अजीब दौर नसन्नस में फैल जाऊँगा बीमार रात की पलकों पे आज शाम से सिमटा हुआ हूँ मैं औराक़ में छिपाती थी अक़्सर वो तितलियाँ शायद किसी किताब में रक्खा हुआ हूँ मैं हूँ सुर्ख़ फूल पे बिखरा हुआ हूँ मैं शबनम दिल मोम और धूप में बैठा हुआ हूँ मैं कुछ देर बाद राख मिलेगी UగT নুদ্ক लौ बन के इस चराग़ से लिपटा हुआ हूँ मैं से लिए हुए दो सख़्त खुश्क़ रोटियां कब पानी के इन्तिज़ार में बैठा हुआ हूँ मैं लाठी उठा के घाट पे जाने लगे हिरन में पैदा हुआ हूँ मैं कैसे अजीब दौर नसन्नस में फैल जाऊँगा बीमार रात की पलकों पे आज शाम से सिमटा हुआ हूँ मैं औराक़ में छिपाती थी अक़्सर वो तितलियाँ शायद किसी किताब में रक्खा हुआ हूँ मैं - ShareChat