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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्मा की ओर. (Towards Spirituality) chemical component पूरी तरह से dis battery जब organised =7 எர & 7ி battery எ 8 f कहा discharge हो गई है। फिर उसको चार्जर में रख कर electric source के साथ connect करना पड़ता है। इसी प्रकार आज discharge हो गई है। इसका प्रमाण आत्मा की batterry भी है छोटी छोटी बातों में चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा आने लगता  है, self control नही रहा है। ईर्ष्या, द्वेष नकारात्मक बातें आती हैं खुद  से ही परेशान हो जाते हैं कि पहले तो ऐसा नही रहती ऐसा क्यों होता है ? आत्मा की इस होता था, आजकल कमज़ोरी के परिणामस्वरूप आत्मा की तीनों शक्तियों मन, बुद्धि और संस्कार में तालमेल fs गया है। जो सोचते वह बोल नही पाते और जो बोलते वह कर नही पाते। एक अंतर्द्वंद चलता रहता है इससे आत्म विश्वास कम होने लगता है और हताशा बढ़ने लगती है। राजयोग ध्यान के माध्यम से जब परमात्मा से संबंध जुड़ जाता है तब सर्वशक्तियों की ऊर्जा मिलने लगती है। आत्मा में शक्ति भरने वाला एकमात्र स्रोत परमात्मा ही है। जब उससे जुड़ जाते हैं तो हमारे स्वभाव में, संस्कारों में, व्यवहार में एक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे हम स्वयं भी और हमारे आस पास वाले भी महसूस करते हैं। स्वभाव शांत होने लगता है, मानसिक एकाग्रता बढने लगती है अपना कार्य ठीक ढंग से करने लगते हैंl हमारे मन, की की सूक्ष्म शक्तियां सु व्यवस्थित होने लगती संस्कार ٤ ०५ August २०२३ Brahmakumaris आध्यात्मा की ओर. (Towards Spirituality) chemical component पूरी तरह से dis battery जब organised =7 எர & 7ி battery எ 8 f कहा discharge हो गई है। फिर उसको चार्जर में रख कर electric source के साथ connect करना पड़ता है। इसी प्रकार आज discharge हो गई है। इसका प्रमाण आत्मा की batterry भी है छोटी छोटी बातों में चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा आने लगता  है, self control नही रहा है। ईर्ष्या, द्वेष नकारात्मक बातें आती हैं खुद  से ही परेशान हो जाते हैं कि पहले तो ऐसा नही रहती ऐसा क्यों होता है ? आत्मा की इस होता था, आजकल कमज़ोरी के परिणामस्वरूप आत्मा की तीनों शक्तियों मन, बुद्धि और संस्कार में तालमेल fs गया है। जो सोचते वह बोल नही पाते और जो बोलते वह कर नही पाते। एक अंतर्द्वंद चलता रहता है इससे आत्म विश्वास कम होने लगता है और हताशा बढ़ने लगती है। राजयोग ध्यान के माध्यम से जब परमात्मा से संबंध जुड़ जाता है तब सर्वशक्तियों की ऊर्जा मिलने लगती है। आत्मा में शक्ति भरने वाला एकमात्र स्रोत परमात्मा ही है। जब उससे जुड़ जाते हैं तो हमारे स्वभाव में, संस्कारों में, व्यवहार में एक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे हम स्वयं भी और हमारे आस पास वाले भी महसूस करते हैं। स्वभाव शांत होने लगता है, मानसिक एकाग्रता बढने लगती है अपना कार्य ठीक ढंग से करने लगते हैंl हमारे मन, की की सूक्ष्म शक्तियां सु व्यवस्थित होने लगती संस्कार ٤ ०५ August २०२३ Brahmakumaris - ShareChat