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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - {) साल ग़ुज़रा है तो एहसास हुआ है मुझको , ।। ज़िन्दगी तल्ख़ ही सही उसने गुज़र जाना है,।। {) साल ग़ुज़रा है तो एहसास हुआ है मुझको , ।। ज़िन्दगी तल्ख़ ही सही उसने गुज़र जाना है,।। - ShareChat