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विदित है कि गांधी जी का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और चूँकि उनके पिता दीवान थे, इसलिये उन्हें अन्य धर्मों के लोगों से मिलने का भी काफी अवसर मिला, उनके कई इसाई और मुस्लिम दोस्त थे। साथ ही गांधी जी अपनी युवा अवस्था में जैन धर्म से भी काफी प्रभावित थे। कई विश्लेषकों का मानना है कि गांधी जी ने ‘सत्याग्रह’ की अवधारणा हेतु जैन धर्म के प्रचलित सिद्धांत ‘अहिंसा’ से प्रेरणा ली थी। गांधी जी ने ‘भगवान’ को ‘सत्य’ के रूप में उल्लेखित किया था। उनका कहना था कि “मैं लकीर का फकीर नहीं हूँ।” वे संसार के सभी धर्मों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर कसकर देखते थे, जो भी उसमें खरा नहीं उतरता वे उसे अस्वीकार कर देते और जो उसमें खरा उतरता वे उसे स्वीकार कर लेते थे। गांधी जी के अनुसार, हमने धर्म को केवल खानपान का विषय बनाकर उसकी प्रतिष्ठा कम कर दी है। वे चाहते थे कि सभी धर्म के लोग अपने धर्म के साथ-साथ दूसरे धर्म के ग्रंथों और उनके अनुयायियों का भी आदर करें। #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👌रियलिटी शो
✍मेरे पसंदीदा लेखक - आजादी का कोई अर्थ नहीं है, यदि उसमें गलतियां करने की आजादी शामिल न हो. महात्मा गांधी आजादी का कोई अर्थ नहीं है, यदि उसमें गलतियां करने की आजादी शामिल न हो. महात्मा गांधी - ShareChat