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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - फ़ितरत बदलना किसी के बस की बात नहीं, इसलिए शिकवा भी बेकार है। वो जैसे हैं, वैसे सही = और हम जैसे हैं , वैसे सही। फ़ितरत बदलना किसी के बस की बात नहीं, इसलिए शिकवा भी बेकार है। वो जैसे हैं, वैसे सही = और हम जैसे हैं , वैसे सही। - ShareChat