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जानिए विपश्यना क्या है? विपस्सना एक प्राचीन और अद्भुत ध्यान प्रयोग है। इसका शाब्दिक अर्थ है, देखकर लौटना। मतलब आओ और देखो, और फिर मानों। यह आत्मशुद्धि और आत्मनिरीक्षण की सबसे बेहतरीन ध्यान पद्धति है। हजारों साल पहले भगवान बुद्ध ने विपस्सना के जरिए ही बुद्धत्व को हासिल किया था। उन्होंने इसका अभ्यास लोगों से भी करवाया था। यह ध्यान आपको खुद को जानने में मदद करता है। आज के दौर में दुनिया भर में इस ध्यान से होने वाले लाभ के बारे में चर्चा है और लोग बड़े उत्साह के साथ इसका अभ्यास कर रहे हैं। विपश्यना के पांच सिद्धांत – पांच सिद्धांत विपस्सना ध्यान का अहम हिस्सा है। इनमें किसी भी प्रकार की जीव-हिंसा न करना, चोरी से दूर रहना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, अपशब्दों का प्रयोग न करना तथा नशे आदि से दूर रहना शामिल हैं। कब करें विपस्सना ध्यान – विपस्सना ध्यान सुबह और शाम दोनों वक्त किया जा सकता है। एक घंटा सुबह और एक घंटा शाम को इसका अभ्यास करना काफी लाभकारी होता है। सोने से पांच मिनट पहले और उठने के पांच मिनट बाद भी इसका अभ्यास अच्छा माना जाता है। कैसे करें विपस्सना – विपस्सना का अभ्यास करने के लिए सबसे जरूरी है कि उसके लिए आप पूरी मनोस्थिति के साथ तैयार हो जाएं। इसमें ध्यान की अवस्था में बैठकर अपने सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। सांसों के आने जाने पर ध्यान लगाएं। सांस आपकी नाक के छिद्रों से अंदर आ रहा है और फिर बाहर जा रहा है, ऐसा महसूस करें। जब सांस आप अंदर खींचते हैं तब आपका पेट फूल जाता है, जब छोड़ते हैं तो पेट पिचकता है। इस तरह से अपने ध्यान को अपने सांसों पर केंद्रित करने की कोशिश करें। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने पर कुछ ही दिन बाद आपको इसका असर महसूस होने लगेगा। विपस्सना के लाभ – विपस्सना ध्यान मन की अद्भुत शांति के लिए, तनाव से पूर्णतः छुटकारा दिलाने के लिए, हर तरह की मानसिक समस्या के पूर्णतः निदान के लिए जानी जाती है। दिमाग को स्वस्थ बनाने के लिए यह एक दिव्य अभ्यास है।
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11 મહિના પહેલા
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હું આ પોસ્ટની ફરિયાદ કરવા માંગુ છુ, કારણકે આ પોસ્ટ...
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