BK. BHAVNA. J.PANCHAL👸
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*🏵️🔲 अमृतकथा प्रसंग क्र 2155 🔲🏵️* --------====== ॐ =====-------- *🏵️🟨 भगवान के लीला का रहस्य 🟨🏵️* गोकुल और द्वारका की पावन कथाओं में एक अत्यंत भावुक लोककथा सुनाई जाती है। कहा जाता है कि एक दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय बहन सुभद्रा नदी में स्नान करने गईं। नदी का जल शांत दिखाई दे रहा था, लेकिन उसके भीतर तेज़ धाराएं बह रही थीं। किसी को भी इस बात का आभास नहीं था कि अगले ही क्षण एक ऐसी लीला घटने वाली है, जिसे देखकर सभी आश्चर्यचकित रह जाएंगे। सुभद्रा जैसे ही नदी के भीतर आगे बढ़ीं, अचानक उनका पैर फिसल गया। देखते ही देखते वे गहरे पानी में चली गईं। तेज़ बहाव उन्हें अपनी ओर खींचने लगा। उन्होंने सहायता के लिए पुकार लगाई। तट पर उपस्थित लोगों में हड़कंप मच गया। हर कोई घबराकर इधर-उधर देखने लगा। सभी की निगाहें केवल एक व्यक्ति पर जाकर ठहर गईं—स्वयं भगवान श्रीकृष्ण पर। सबको पूरा विश्वास था कि जो गोवर्धन पर्वत उठा सकते हैं, जो कालिय नाग का दमन कर सकते हैं, उनके लिए अपनी बहन को बचाना तो पलभर का कार्य है। लेकिन तभी एक ऐसा दृश्य दिखाई दिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण अपनी जगह से तनिक भी नहीं हिले। उनके चेहरे पर वही शांत और मधुर मुस्कान थी। वे बड़ी गंभीर दृष्टि से पूरी घटना को देखते रहे, मानो उन्हें पहले से ही सब कुछ ज्ञात हो। लोगों के मन में अनेक प्रश्न उठने लगे। क्या भगवान अपनी ही बहन को डूबता हुआ देखते रहेंगे? आखिर वे आगे क्यों नहीं बढ़ रहे? उसी समय राधारानी वहां पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने सुभद्रा को तेज़ धार में संघर्ष करते देखा, उन्होंने एक क्षण का भी विलंब नहीं किया। बिना किसी भय के वे तुरंत नदी में कूद पड़ीं। प्रबल जलधारा से संघर्ष करते हुए वे सुभद्रा तक पहुंचीं, उनका हाथ थामा और अथक प्रयास के बाद उन्हें सुरक्षित किनारे पर ले आईं। सुभद्रा के प्राण बच गए। उपस्थित सभी लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन उनके मन में एक ही प्रश्न था—जब स्वयं श्रीकृष्ण वहां उपस्थित थे, तब उन्होंने यह कार्य स्वयं क्यों नहीं किया? सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से इसका कारण पूछा। तब प्रभु मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, "तुम सबने केवल इस जन्म की घटना देखी है, लेकिन मैं जन्म-जन्मांतर के संबंधों को जानता हूं। आज जो हुआ है, वह एक बहुत पुराने वचन और सेवा का प्रतिफल है।" भगवान ने बताया कि त्रेता युग में जब रावण माता सीता का हरण करके उन्हें अशोक वाटिका ले गया था, तब वहां त्रिजटा नाम की एक धर्मपरायण राक्षसी रहती थी। यद्यपि वह राक्षस कुल में जन्मी थी, लेकिन उसका हृदय अत्यंत पवित्र और भक्तिमय था। जब माता सीता विरह, अपमान और पीड़ा से व्याकुल होकर निराश हो जाती थीं, तब त्रिजटा ही उन्हें सांत्वना देती थी। वह बार-बार कहती, "माता, धैर्य रखिए। प्रभु श्रीराम अवश्य आएंगे। सत्य और धर्म की विजय निश्चित है।" त्रिजटा ने कभी किसी स्वार्थ के लिए सेवा नहीं की। उसने केवल धर्म और भक्ति के भाव से माता सीता की रक्षा की, उनका मनोबल बढ़ाया और कठिन समय में उनका साथ निभाया। जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके माता सीता को मुक्त कराया, तब उन्हें त्रिजटा की निस्वार्थ सेवा का पूरा ज्ञान हुआ। प्रभु श्रीराम ने त्रिजटा से कहा, "तुमने मेरी अर्धांगिनी की जिस प्रेम, करुणा और निष्ठा से सेवा की है, उसका ऋण मैं कभी नहीं भूल सकता। अगले जन्म में मैं तुम्हें अपनी बहन बनने का सौभाग्य दूंगा।" कालचक्र घूमता रहा। त्रेता युग समाप्त हुआ और द्वापर युग का आगमन हुआ। एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, श्रीराम ने अपने उसी वचन को निभाते हुए त्रिजटा को सुभद्रा के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया। इस प्रकार त्रिजटा भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा बनीं। किंतु भगवान का एक और संकल्प अभी अधूरा था। श्रीकृष्ण ने आगे कहा, "त्रिजटा ने जिस प्रकार माता सीता के प्राणों की रक्षा की थी, उसी सेवा का प्रतिदान भी होना आवश्यक था। आज जब सुभद्रा संकट में पड़ी, तब यदि मैं स्वयं उन्हें बचा लेता, तो वह अधूरा ऋण कभी पूरा नहीं हो पाता। इसलिए मैंने राधा के माध्यम से उनकी रक्षा करवाई, ताकि सेवा का वह दिव्य संबंध पूर्ण हो सके।" भगवान ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं अपने भक्तों का प्रेम, त्याग और सेवा कभी नहीं भूलता। जो मेरे लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करता है, उसका प्रत्येक उपकार उचित समय आने पर अवश्य लौटाया जाता है। मेरे यहां न प्रेम व्यर्थ जाता है, न सेवा और न ही सच्चा समर्पण।" यह सुनकर वहां उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्हें समझ आ गया कि भगवान की प्रत्येक लीला के पीछे कोई गहरा रहस्य और दिव्य उद्देश्य छिपा होता है। जो घटना बाहर से साधारण दिखाई देती है, उसके पीछे जन्मों-जन्मों का संबंध और भगवान का अटल न्याय कार्य कर रहा होता है। इस लोककथा का संदेश यही है कि भगवान कभी भी सच्चे प्रेम, निस्वार्थ सेवा और त्याग को नहीं भूलते। समय चाहे कितना भी बीत जाए, उनका प्रत्येक वचन और प्रत्येक ऋण उचित समय पर अवश्य पूर्ण होता है। *🧡🍃🔲 ॐ शांति 🔲🍃🧡* #🌞 Good Morning કોટ્સ મોશન વિડિઓ #👫 મારા મિત્ર માટે #👨‍👩‍👧‍👦 પરિવાર પ્રેમ #🔱 હર હર મહાદેવ #🙏 જય શ્રી કૃષ્ણ
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