❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
🌸 श्रावण मास महात्म्य (अध्याय ५):
शिव कृपा और चमत्कारिक 'रविवार व्रत' की अद्भुत कथा! ☀️✨
क्या आप जानते हैं कि श्रावण मास में केवल सोमवार ही नहीं, बल्कि रविवार के व्रत का भी अत्यंत विशेष महत्व है? स्कंद पुराण में भगवान शिव और सनत्कुमार के संवाद में श्रावण के पुण्यों और एक दरिद्र ब्राह्मण की कथा का सुंदर वर्णन है। आइए जानते हैं:
🔱 श्रावण मास में शिव पूजा के अचूक उपाय और लाभ:
पार्थिव शिवलिंग: इस मास में मिट्टी, स्फटिक या चंदन के शिवलिंग बनाकर षडाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) से पूजा करने पर भगवान शिव की विशेष सन्निधि प्राप्त होती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
पंचामृत अभिषेक: जो भक्त श्रावण में शिवजी का पंचामृत से अभिषेक करते हैं, वे सदा सुखी और शिव को अत्यंत प्रिय होते हैं।
पुरुष सूक्त का पाठ: इस पवित्र मास में पुरुष सूक्त का पाठ करने से जाने-अनजाने में हुए बड़े से बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को अक्षय पुण्य मिलता है।
भूमि शयन व प्रातः स्नान: श्रावण में भूमि पर सोने वाला कैलाश में स्थान पाता है और एक दिन का प्रातः स्नान पूरे वर्ष के स्नान के बराबर फल देता है!
☀️ दरिद्र ब्राह्मण 'सुकर्मा' और रविवार व्रत का चमत्कार
प्रतिष्ठानपुर नगर में सुकर्मा नाम का एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण भिक्षा मांगकर जीवन यापन करता था। एक दिन उसने कुछ महिलाओं को श्रावण के रविवार का एक गुप्त और चमत्कारी व्रत करते देखा। अनुनय-विनय करने पर एक प्रौढ़ स्त्री ने उसे इस व्रत का विधान बताया:
🙏 श्रावण के रविवार व्रत की विधि:
श्रावण शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को मौन रहकर प्रातः शीतल जल से स्नान करें।
एक पान के पत्ते पर लाल चंदन से 12 परिधियों वाला सूर्य का सुंदर मंडल बनाएं।
लाल चंदन, लाल पुष्प (जपाकुसुम) और अर्घ्य के साथ सूर्य देव का 12 बार नमस्कार कर पूजन करें।
मिश्री युक्त नारियल का नैवेद्य अर्पित करें।
6 धागों वाले सूत्र (धागे) में 6 गाठें लगाकर सूर्य देव को अर्पित करें और फिर उसे अपने गले में धारण कर लें।
(नोट: यह व्रत अत्यंत सिद्ध है और इसका अधिक बखान नहीं करना चाहिए। श्रावण के 4 या 5 रविवार इसे करके उद्यापन करना चाहिए।)
✨ व्रत का फल:
ब्राह्मण सुकर्मा ने घर आकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। शिव और सूर्य देव की कृपा से उसके घर में लक्ष्मी का वास हो गया। उसकी दोनों कन्याएं अत्यंत रूपवान हो गईं, जिनका विवाह स्वयं नगर के राजा से हुआ। इस व्रत के प्रभाव से धनहीन को धन, पुत्रहीन को संतान, और रोगी को स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
जो भी भक्त इस कथा का श्रवण करता है, उसके सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।
अगर आपको यह पौराणिक कथा पसंद आई हो, तो कमेंट में 'हर हर महादेव' और 'जय सूर्य देव' अवश्य लिखें और इसे अपने प्रियजनों के साथ शेयर करें। 🙏
।। ॐ नमः शिवाय ।।
।। हर हर महादेव ।।
. !! जय जय श्री महाकाल !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
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