Heartiest wishes to all of you on the 80th Indepe
आज़ादी… आज़ादी… — क्या किसी नारे का इस्तेमाल ही उसकी पूरी कहानी तय कर देता है?
भ्रष्टाचार से आज़ादी, पेपर लीक से आज़ादी, बेरोज़गारी से आज़ादी, नफ़रत से आज़ादी — क्या इन सवालों को उठाना भी विवाद का विषय होना चाहिए?
यह गीत अभिव्यक्ति की आज़ादी, छात्र राजनीति, लोकतांत्रिकअसहमति और सवाल पूछने के अधिकारपर एक व्यंग्यात्मक और विचारोत्तेजक प्रस्तुति है।जब किसी नारे को उसके संदर्भ से अलग करके देखा जाता है, तो सवाल उठता है —
क्या शब्दों का अर्थ हमेशा एक ही होता है?
क्या किसी एक समूह द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे से वह नारा हमेशा के लिए उसी समूह का हो जाता है?
झारखंड में छात्रों द्वारा “आज़ादी” जैसे नारों को लेकर उठे विवाद/विरोध के संदर्भ में यह गीत एक सीधा सवाल पूछता है —
क्या हर “आज़ादी” का नारा एक जैसा है?
भ्रष्टाचार से आज़ादी माँगना,
पेपर लीक से आज़ादी माँगना,
बेरोज़गारी से आज़ादी माँगना,
नफ़रत से आज़ादी माँगना —
इन सवालों पर भी बातचीत होनी चाहिए।
यह गीत किसी व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र के खिलाफ नहीं है। यह सवाल पूछने, असहमति व्यक्त करने और लोकतांत्रिक संवाद के अधिकार पर एक रचनात्मक टिप्पणी है।
##आज़ादी#FreedomOfSpeech#ProtestSong #jharkhand students 🙏