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#🙏 देवी दर्शन🌸
शुरुआत: चमोली जिले के नौटी गांव (या कुरुड़) से मां की विदाई और पूजा-अर्चना के साथ यात्रा शुरू होती है।शुरुआती पड़ाव: ईड़ा बधाणी, कुलसारी, चेपड़ियूं और नंदाकेशरी (जहां कुमाऊं क्षेत्र की नंदा देवी की डोली भी इस यात्रा में शामिल होती है)।मध्य पड़ाव और ऊंचाई की ओर: इसके बाद डोली वाण गांव पहुंचती है। वाण गांव को मां नंदा के क्षेत्र का अंतिम इंसानी निवास माना जाता है। इसके आगे लाटू देवता के मंदिर में पूजा होती है।दुर्गम बुग्याल: यात्रा आगे बढ़ते हुए बेदनी बुग्याल और गोरसो बुग्याल जैसे बेहद खूबसूरत और ऊंचे घास के मैदानों से गुजरती है।रूपकुंड (कंकाल झील): लगभग 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित रहस्यमयी रूपकुंड झील से होकर श्रद्धालु गुजरते हैं, जहां पत्थरों के बीच मानव कंकाल दिखाई देते हैं।ज्यूरांगली दर्रा: यह इस यात्रा का सबसे खतरनाक और सीधा चढ़ाई वाला दर्रा है (लगभग 17,500 फीट)।होमकुंड (अंतिम गंतव्य): नंदा घुंटी पर्वत के आधार पर स्थित होमकुंड इस यात्रा का आखिरी स्टेशन है। यहीं पर महायज्ञ पूरा होता है और चार सींग वाले मेढ़े को मां की भेंट और पोटली के साथ हिमालय की चोटियों की तरफ अकेले विदा कर दिया जाता है।वापसी: होमकुंड से श्रद्धालु सुतोल और घाट के रास्ते नीचे उतरते हैं। #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #uttarakhand