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- कमल टांक बंशी वाल्मीकि#mahadev ❤️ Bhagwan Shiv Mata Sati ke 💞 Prem Ki nishani daksheshwar Mandir 🛕kankhal Haridwar state Uttarakhand devbhumi 🚩🚩 हरिद्वार के *कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर* ही माता सती और भगवान शिव की प्रेम कहानी का साक्षी है। *क्या है कथा:* 1. कनखल को भगवान शिव का *ससुराल* कहा जाता है। ब्रह्मा जी के पुत्र राजा दक्ष प्रजापति की राजधानी यही कनखल थी और उनकी पुत्री सती का स्वयंवर भी यहीं हुआ था। सती ने मन ही मन शिव जी को पति माना था। 2. इसी कनखल में राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया था, जिसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया पर अपने दामाद शिव जी को नहीं बुलाया। 3. पिता के यज्ञ में पति का अपमान देखकर माता सती ने उसी यज्ञ कुंड में कूदकर आत्मदाह कर दिया था। वह कुंड आज भी मंदिर परिसर में है। इसीलिए कनखल सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि शिव-सती के प्रेम, त्याग और समर्पण की निशानी है। मान्यता है कि सावन के महीने में शिव जी आज भी अपनी ससुराल कनखल में ही वास करते हैं।1514
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- कमल टांक बंशी वाल्मीकि#mahadev ❤️ , *शिव महापुराण में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि भगवान शिव नशा करते थे।* शिव पुराण के अनुसार जो बात कही गई है वो ये है: - *भांग का वर्णन ही नहीं है पूजा में।* उमा-महेश्वर संवाद में भगवान शिव स्वयं कहते हैं - जो पलाश, बेलपत्र, आक के फूल, फल, फूल, साग या जल भक्ति से देता है वो मुझे प्रिय है। इसमें भांग का नाम नहीं आता। - संतों और विद्वानों का भी यही कहना है कि शिव महापुराण में कहीं नहीं लिखा कि भगवान शिव नशा करते थे, तस्वीरों में उन्हें भांग-गांजा पीते हुए गलत दिखाया जाता है, ये समाज में गलत संदेश दे रही हैं। *फिर भांग-धतूरा चढ़ता क्यों है?* इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब समुद्र से हलाहल विष निकला और किसी ने ग्रहण नहीं किया, तो शिव जी ने सृष्टि की रक्षा के लिए उसे अपने गले में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव से वह अचेत हो गए, तो उसके ताप को कम करने के लिए देवताओं ने उनके सिर पर भांग-धतूरा रखा और निरंतर जलाभिषेक किया। इसीलिए भांग-धतूरा औषधि और शीतलक के रूप में शिवलिंग पर *अर्पित* किया जाता है, सेवन करने के लिए नहीं। कुछ विद्वान इसका प्रतीकात्मक अर्थ भी बताते हैं कि भक्त अपना अहंकार, क्रोध जैसी बुराइयों रूपी नशे को भगवान के चरणों में समर्पित कर रहा है। भगवान स्वयं किसी नशे के आदी नहीं थे, वे तो संसार के विष को धारण करने वाले हैं।1221