एक ऐसा भाषण… जो मंच से कभी दिया नहीं गया, लेकिन उसके शब्दों ने भारत की सामाजिक व्यवस्था पर सबसे बड़े सवाल खड़े कर दिए। 1936 में डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने “Annihilation of Caste” लिखा—सिर्फ़ जाति पर सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि बराबरी, स्वतंत्रता और इंसानियत की नई बहस शुरू करने के लिए। भाषण रुक गया… लेकिन विचार नहीं रुके। और शायद इसलिए इतिहास बदल गया। 🔥📜⚖️ क्या आज भी हम उस सवाल का जवाब देने से बच रहे हैं? ✊ #Annihilation#जयभीमा✊🖊️🫡# #babasaheb ambedkar
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