🔥 1927 सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं थी… वो सदियों पुरानी असमानता को चुनौती देने का ऐलान था। मनुस्मृति दहन एक प्रतीकात्मक विरोध था—उस सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ़, जिसे डॉ. बी. आर. अंबेडकर अन्याय और असमानता से जोड़कर चुनौती दे रहे थे। 🔥📜 यह आग सिर्फ़ एक किताब तक सीमित नहीं थी, बल्कि बराबरी, सम्मान और इंसाफ़ के लिए उठी आवाज़ का प्रतीक बन गई। इतिहास को सिर्फ़ याद मत करो… उसके पीछे का सवाल भी समझो। ⚖️✊ #मनुस्मृति दहन #बाबा साहब डा अम्बेडकर #जय भीमा✊
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