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- sn vyas#भगवान #भक्ति #जय श्री कृष्ण दर्शन दो घनश्याम, दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे.. मंदिर मंदिर मूरत तेरी, फिर भी न दिखे सुरत तेरी, युग बिते ना आई मिलन की पूर्णमासी रे.. दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे.. द्वार दया का जब तू खोले, पंच सुर मे गंगा बोले, अंधा देखेँ लंगङा चल कर पँहुचे काशी रे.. दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे.. पानी पी कर प्यास बुझाऊँ, नैनोँ को कैसै समझाऊँ, आँख मिचौली छोङो अब तो घट-घट वासी रे.. दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे.. जय श्रीकृष्ण.... .142107
- Bhagchand jangid🔥☀️सूर्य नारायण 🙏🔥 #Surya #morning #good morning #bhagwan #bhagwan surya dev☀️7475
- sn vyas#भगवान 🙏।।श्रीहरिः।।🙏 🧘 *..भगवान् हरदम आपको देखते रहते हैं..*🧘 🛐*भगवान् हमारे हैं और शरीर हमारा नहीं है— इतनी ही बात है, लम्बी-चौड़ी बात नहीं है।* 🛐 ⁉️* बात तो समझ में आती है, पर वह मन में पूरी उतरती नहीं !⁉️ ✍️* आपको बात समझ में आती हो तो उसका आदर करो। आप दस हजार, लाख रुपयों का तो आदर करते हो, पर उनका आदर करना अपना पतन करना है, और इस बात का आदर करना अपना उद्धार करना है! *जितने भी दोष हैं, सब देहाभिमान से पैदा होते हैं।* शरीर माँ के पेट में बना है और यहीं छोड़ कर जाओगे। जो चीज मिलती है और बिछुड़ जाती है, वह हमारी नहीं होती- यह आपको कसौटी बतायी है।✍️ 🌍संसार में हमारी कोई चीज नहीं है-इसमें जितनी शंका करो, सब चलेगी; परन्तु भगवान् हमारे हैं- इसमें शंका नहीं चलेगी। इसको तो मानना ही पड़ेगा। पहले संसार को जानना पड़ता है और भगवान् को मानना पड़ता है। पीछे भगवान् माने हुए नहीं रहते, साक्षात् हो जाते हैं।🌍 🕉️भगवान् हरदम आपको देखते रहते हैं। *जैसे बच्चा माँ-माँ कहे तो माँ खुश हो जाती है, ऐसे ही जब आप भगवान् को अपना कहते हैं, तब भगवान् को बहुत खुशी होती है!* माँ तो एक जन्म की होती है, पर भगवान् सदा की माँ है !🕉️5026
- Shaurya Nautiyal 🔥🔥😈🤘🤘🎸Jai Ho Ganesh bhagwan aur sath uske Prathna aur ashirwad ka sath Jai ho sabko 🙏🙏💖🎬🎥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🤘🤘🤙🤙😯😄✨✨💯😈🔥🔥🔥🔥🔥🔥 #ganesh #bhagwan290306
- Khyati Verma#🙏🏻 मेरे भगवान 🙏🏻 #नीला आसमान 🌌 #🌹हे विष्णु विधाता 🌹 #भगवान #🕉 शिव भजन🙏1415
- Dr. Monikaभस्म से जो श्रृंगार करे #viral #sharechat #bhagwan #shorts #whatsapp1614
- sn vyas#भगवान *"क्या भगवान भोजन करते हैं? क्या भगवान हमारे द्वारा चढ़ाया गया भोग खाते हैं ? यदि खाते हैं, तो वह वस्तु समाप्त क्यों नहीं हो जाती ? और यदि नहीं खाते हैं, तो भोग लगाने का क्या लाभ ? एक लड़के ने पाठ के बीच में अपने गुरु से यह प्रश्न किया। गुरु ने तत्काल कोई उत्तर नहीं दिया। वे पूर्ववत् पाठ पढ़ाते रहे। उस दिन उन्होंने पाठ के अन्त में एक श्लोक पढ़ाया: पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ पाठ पूरा होने के बाद गुरु ने शिष्यों से कहा कि वे पुस्तक देखकर श्लोक कंठस्थ कर लें। अगले दिन गुरु ने प्रश्न करने वाले शिष्य से पूछा कि उसे श्लोक कंठस्थ हुआ कि नहीं ? उस शिष्य ने पूरा श्लोक शुद्ध-शुद्ध गुरु को सुना दिया। फिर भी गुरु ने सिर 'नहीं' में हिलाया, तो शिष्य ने कहा कि" वे चाहें, तो पुस्तक देख लें; श्लोक बिल्कुल शुद्ध है।” गुरु ने पुस्तक देखते हुए कहा“ श्लोक तो पुस्तक में ही है, तो तुम्हारे दिमाग में कैसे चला गया? शिष्य कुछ भी उत्तर नहीं दे पाया। तब गुरु ने कहा“ पुस्तक में जो श्लोक है, वह स्थूल रूप में है। तुमने जब श्लोक पढ़ा, तो वह सूक्ष्म रूप में तुम्हारे दिमाग में प्रवेश कर गया,उसी सूक्ष्म रूप में वह तुम्हारे मस्तिष्क में रहता है। और जब तुमने इसको पढ़कर कंठस्थ कर लिया, तब भी पुस्तक के स्थूल रूप के श्लोक में कोई कमी नहीं आई। इसी प्रकार पूरेविश्व में व्याप्त परमात्मा हमारे द्वारा चढ़ाए गए निवेदन को सूक्ष्म रूप में ग्रहण करते हैं,और इससे स्थूल रूप के वस्तु में कोई कमी नहीं होती। उसी को हम *प्रसाद* के रूप में ग्रहण करते हैं। शिष्य को उसके प्रश्न का उत्तर मिल गया।214129
- Priya#bhagwan #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕1K1K
- It's Dk🫥Gupta#🚩राजन जी महराज🚩 भजन कीर्तन🚩 #श्री राजन जी महाराज की अमृतवाणी #राजन जी महाराज #भगवान #भ भक्ति भावनाएं576825