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#51 शक्तिपीठ #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🔱हर हर महादेव #🔱शिवपुराण कथा📖
देवी पुराण (श्रीमद्देवीभागवत पुराण) के सातवें स्कंध में भगवती सती के आत्मदाह और 51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति का अत्यंत भावुक और अलौकिक वर्णन मिलता है।
1. प्रजापति दक्ष का महायज्ञ और शिव का अपमान
प्रजापति दक्ष (माता सती के पिता) ने एक विशाल 'बृहस्पतिसर्व' नामक यज्ञ का आयोजन किया। दक्ष, भगवान शिव से द्वेष रखते थे, इसलिए उन्होंने इस यज्ञ में सभी देवताओं, ऋषियों और मुनियों को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और सती को निमंत्रण नहीं भेजा।
2. सती का पिता के घर गमन
जब माता सती ने आकाश मार्ग से देवताओं को अपनी पत्नियों सहित यज्ञ में जाते देखा, तो उन्होंने भी पिता के घर जाने की इच्छा प्रकट की। भगवान शिव ने बिना बुलाए जाने पर अपमान की आशंका जताई और सती को रोकने का प्रयास किया। परंतु, सती के अत्यधिक हठ करने पर शिव जी ने उन्हें अपने गणों के साथ जाने की अनुमति दे दी।
3. यज्ञ मंडप में अनादर और सती का आत्मदाह
पिता के घर पहुँचने पर सती ने देखा कि यज्ञ मंडप में भगवान शिव के लिए कोई स्थान या भाग नहीं रखा गया था। जब सती ने इसका कारण पूछा, तो दक्ष ने भगवान शिव के लिए अत्यंत कटु और अपमानजनक शब्द कहे।
पति के इस घोर अपमान को सती सहन न कर सकीं। उन्होंने कहा कि जिस शरीर ने शिव-निंदा सुनी है, वह शरीर अब धारण करने योग्य नहीं है। सती ने योगबल से अपनी ही देह में 'योगाग्नि' प्रकट की और स्वयं को उस अग्नि में भस्म कर दिया।
4. शिव का तांडव और सती का पार्थिव शरीर
सती के आत्मदाह की सूचना मिलते ही भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने अपनी जटा से 'वीरभद्र' को उत्पन्न किया, जिसने जाकर दक्ष के यज्ञ को विध्वंस कर दिया और दक्ष का वध कर दिया।
इसके बाद, वियोग से व्याकुल भगवान शिव सती के आंशिक रूप से जले हुए पार्थिव शरीर को अपने कंधों पर उठाकर संपूर्ण ब्रह्मांड में उन्मत्त होकर तांडव करने लगे। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।
5. 51 शक्तिपीठों की उत्पत्ति
सृष्टि को प्रलय से बचाने और भगवान शिव का मोह-भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर को धीरे-धीरे काटना शुरू किया।
सती के शरीर के अंग, वस्त्र और आभूषण भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि) के जिन-जिन 51 स्थानों पर गिरे, वे स्थान परम पवित्र 'शक्तिपीठ' कहलाए। #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱