सरस्वती ओमँ शान्ती
#📿संतवाणी 🗣️ अक्सर जीवन में किसी चीज़ को पाने को ही सुख और न मिलने को दुख मान लेते हैं, जबकि कई बार हमारी दृष्टि केवल वर्तमान तक सीमित होती है और ईश्वर की व्यवस्था हमारे पूरे जीवन की दिशा को ध्यान में रखती है।
कभी हम किसी व्यक्ति, वस्तु, अवसर या परिस्थिति को पाने के लिए बहुत प्रयास करते हैं। जब वह नहीं मिलती तो हमें लगता है कि हमारे साथ अन्याय हुआ है या हमारी प्रार्थना स्वीकार नहीं हुई। लेकिन समय बीतने पर कभी-कभी समझ आता है कि जिसे हम उस समय अपना सौभाग्य समझ रहे थे, वही आगे चलकर हमारे लिए परेशानी, दुख या भटकाव का कारण बन सकता था। तब समझ में आता है कि वह 'न मिलना' भी एक प्रकार की सुरक्षा थी।
जैसे एक छोटा बच्चा किसी ऐसी वस्तु के लिए जिद कर सकता है जो उसके लिए नुकसानदायक हो, लेकिन माँ उसकी इच्छा पूरी नहीं करती। बच्चे को उस समय माँ का निर्णय कठोर लग सकता है, पर माँ जानती है कि उसके लिए क्या उचित है। उसी प्रकार जीवन में हर इच्छा की पूर्ति हमारे हित में हो, यह आवश्यक नहीं।
अभाव भी कभी-कभी जीवन का शिक्षक बन जाता है। जब हमारे हाथ खाली होते हैं, तब हम अपने भीतर झाँकते हैं, अपनी क्षमताओं को पहचानते हैं और यह समझने का अवसर पाते हैं कि हमें वास्तव में चाहिए क्या। कई बार किसी रास्ते का बंद हो जाना हमें उस रास्ते पर आगे बढ़ने से रोकता है, जो हमारी मंज़िल नहीं था।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर असफलता को बिना प्रयास किए ईश्वर की इच्छा मानकर बैठ जाएँ। कर्म करना हमारा दायित्व है और परिणाम को सहजता से स्वीकार करना हमारी परिपक्वता। यदि पूरी ईमानदारी और प्रयास के बाद भी कोई चीज़ नहीं मिलती, तो उसके पीछे छिपे संदेश को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए।
इसलिए जीवन में जब कुछ न मिले, तो तुरंत निराश होने के बजाय स्वयं से पूछें—
“क्या पता यह कमी मेरे लिए किसी बड़ी सुरक्षा का कारण हो?”
“क्या पता यह बंद दरवाज़ा मुझे किसी बेहतर रास्ते की ओर ले जा रहा हो?”
क्योंकि कई बार ईश्वर हमारी इच्छा पूरी करके नहीं, बल्कि हमारी गलत इच्छा को पूरा न करके हमारी रक्षा करते हैं।
और शायद यही कारण है कि कभी-कभी खाली हाथ होना हार नहीं, बल्कि किसी बेहतर प्राप्ति के लिए जीवन द्वारा बनाई जा रही जगह होती है। ओम शांति। आपका दिन मंगलमय हो।