Dinesh Nishad
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🌿 `"सच्ची खुशी बाहर नहीं, भीतर है"`
*🌸 || श्रीमद्भगवद्गीता || 🌸*
> «📘 अध्याय 5, श्लोक 21»
_बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम्।_ _ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते॥_
📝 *सरल अर्थ:* जो व्यक्ति बाहरी सुखों में अत्यधिक आसक्त नहीं होता, वह अपने भीतर मिलने वाले सुख को अनुभव करता है।
ऐसा व्यक्ति स्थायी और गहरी शांति प्राप्त करता है।
🌸 *सुंदर व्याख्या:* हम अक्सर सोचते हैं—
_“यह मिल जाए तो मैं खुश हो जाऊँगा।”_
लेकिन एक इच्छा पूरी होते ही
दूसरी इच्छा सामने आ जाती है।
*श्रीकृष्ण कहते हैं* — बाहरी चीज़ों से मिलने वाली खुशी अस्थायी है, जबकि भीतर का संतोष अधिक स्थायी है।
इसलिए खुशी को केवल लोगों, चीज़ों या परिस्थितियों से मत जोड़िए।
🌸 *।। जय श्री कृष्ण ।।* 🌸 #राधे राधे 🌹जय श्री कृष्णा🌹 श्री बांकेबिहारी 🌺बरसना 🌺भाजन🌺 फोटो 🥰सुप्रभात🌷 श्री खाटूश्यामजी 🌹 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
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