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meena mittal - Author on ShareChat
meena mittal
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    -shashvendra singh rajput
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  • -shashvendra singh rajput - Author on ShareChat
    -shashvendra singh rajput
    ##satbakti sandesh #जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी Visit Sa News YouTube
    बदीछाड सतगुरू रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में ६२१ वां दिवस परुश्वर प्रकट  कब 29 লূন 2026 ٦ समाज सुधारक पाखंडवाद और अंधविश्वास से आजादी समाज में फैले पाखंड , अंधविश्वास और व्यर्थ के कर्मकांडों का संत रामपाल जी महाराज ने अपने सप्रमाण तत्वज्ञान द्वारा खंडन किया है। आज लाखों लोग अंधश्रद्धा छोड़कर सत्य मार्ग पर चल रहे हैं। वीडियो देखें SA News Channel YouTubel SA NEKS Channel @SatlokAshramNewsChannel बदीछाड सतगुरू रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में ६२१ वां दिवस परुश्वर प्रकट  कब 29 লূন 2026 ٦ समाज सुधारक पाखंडवाद और अंधविश्वास से आजादी समाज में फैले पाखंड , अंधविश्वास और व्यर्थ के कर्मकांडों का संत रामपाल जी महाराज ने अपने सप्रमाण तत्वज्ञान द्वारा खंडन किया है। आज लाखों लोग अंधश्रद्धा छोड़कर सत्य मार्ग पर चल रहे हैं। वीडियो देखें SA News Channel YouTubel SA NEKS Channel @SatlokAshramNewsChannel
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  • -shashvendra singh rajput - Author on ShareChat
    -shashvendra singh rajput
    #जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी Visit Sa News YouTube ##satbakti sandesh
    য৪ন কা নাস ২৫০] समाज सुधारक बेजुबानों के लिए साफ पानी की व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज ने केवल मनुष्य के सानिध्य में निरंतर सेवा की सुध नहीं ली बल्कि उन बेजुबानों की भी सुध ली है जो अपनी तकलीफ़ को मुहिम अन्नपूर्णा  नहीं सकते। जिन गॉंवों के तालाबों में बता बेजुबानों के लिए बेजुबानों के पीने के लिए साफ़ पानी नहीं साफ पानी की व्यवस्था अननपूर्णा থা বঙা মন যাসপাল সী সমাযাস मुहिम का भी कार्य মাক্ষ পানী पहुंचाने कर रहे हैं। मुहिम  3লপুতা : নন্রুবানী ক লিয साफ पानी की व्यवस्था  अनपूर्णा अनपण ]7 अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत हमारी प्रतिबद्धताएं साफ़ पानी बेजुबानों के मानवता और सभी दयाः करूणा কী অনথো और सेवा प्राणियों का कल्याण स्वास्थ्य का ध्यान मिलकर समाज को दयालु और संवेदनशील बनाएं परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है आइए, हम सब SA News Channell YouTube SANEWS Channel 9 @SatlokAshramNewsChannel { য৪ন কা নাস ২৫০] समाज सुधारक बेजुबानों के लिए साफ पानी की व्यवस्था संत रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज ने केवल मनुष्य के सानिध्य में निरंतर सेवा की सुध नहीं ली बल्कि उन बेजुबानों की भी सुध ली है जो अपनी तकलीफ़ को मुहिम अन्नपूर्णा  नहीं सकते। जिन गॉंवों के तालाबों में बता बेजुबानों के लिए बेजुबानों के पीने के लिए साफ़ पानी नहीं साफ पानी की व्यवस्था अननपूर्णा থা বঙা মন যাসপাল সী সমাযাস मुहिम का भी कार्य মাক্ষ পানী पहुंचाने कर रहे हैं। मुहिम  3লপুতা : নন্রুবানী ক লিয साफ पानी की व्यवस्था  अनपूर्णा अनपण ]7 अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत हमारी प्रतिबद्धताएं साफ़ पानी बेजुबानों के मानवता और सभी दयाः करूणा কী অনথো और सेवा प्राणियों का कल्याण स्वास्थ्य का ध्यान मिलकर समाज को दयालु और संवेदनशील बनाएं परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है आइए, हम सब SA News Channell YouTube SANEWS Channel 9 @SatlokAshramNewsChannel {
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  • -shashvendra singh rajput - Author on ShareChat
    -shashvendra singh rajput
    ##satbakti sandesh ##satbakti sandesh
    भगवान के चिश्मदीद गवाह संत रूमी को कबीर सूफी परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में १५ नवंबर १२४४ को बंदीछोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज कोन्या में मिले। जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद (সুব) হাচম ননইত ক্রী নভান ম Masnavi I The लिखी दो रचनाओं मसनवी और of Rumi navi Ma दीवानए कबीर में भी कबीर परमात्मा  ٧  lalalu अर्थात अल-खिज्र का जिक्र किया है। dMla ulana 611 01n ] Mubwnmad al Din Jalal Rumi Te Ouatrains Duvn Kabi 1 Vol बंदीछोड़़ सतगुरू रामपाल जी महाराज JagatGuruRampaluiorg Vis WW की पावन उपस्थिति में ६२९ वां दिवसु Sant Rampal Ji YOUTUBE कबीर परुश्वर प्रकट Maharaj CHANNEL २९ जून २०२६ nSanRampaJiMamana भगवान के चिश्मदीद गवाह संत रूमी को कबीर सूफी परमात्मा शम्स तबरेज के रूप में १५ नवंबर १२४४ को बंदीछोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज कोन्या में मिले। जिसके बाद रूमी ने अपने मुर्शिद (সুব) হাচম ননইত ক্রী নভান ম Masnavi I The लिखी दो रचनाओं मसनवी और of Rumi navi Ma दीवानए कबीर में भी कबीर परमात्मा  ٧  lalalu अर्थात अल-खिज्र का जिक्र किया है। dMla ulana 611 01n ] Mubwnmad al Din Jalal Rumi Te Ouatrains Duvn Kabi 1 Vol बंदीछोड़़ सतगुरू रामपाल जी महाराज JagatGuruRampaluiorg Vis WW की पावन उपस्थिति में ६२९ वां दिवसु Sant Rampal Ji YOUTUBE कबीर परुश्वर प्रकट Maharaj CHANNEL २९ जून २०२६ nSanRampaJiMamana
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    -shashvendra singh rajput
    ##satbakti sandesh
    श्रीभद भानावत नोतासर गीता ज्ञान दाता किसी के श्रीमद्धगवदीता सामने नहीं आता | = गीता अध्याय 7 श्लोक २५ सर्वस्य योगमायासमावृतः ٦٤ সক্ষাযা: লা্সিতানালি লীক্ষী সামভসন্সমসূ II ২৬ Il  मूढोउयं योगमायासमानृतः , सवस्य अहम , Telg: , मूढः, अयम न अभिजानाति लोकः, माम॰ अजम अव्ययम ।।  २५  तथा अपनो योगमायासे माम् यागमाया - छिपा हुआ  मैं योग माया से छिपा हुआ सबके प्रत्यक्ष नहीं होता अर्थात् अदृश्य रहता समावृतः अजम जन्मराहत अनिनाशी 31641 अव्ययम हूँ इसलिये मुझ जन्म न लेने वाले अविनाशी अटल भावको यह अज्ञानी सर्वस्य सवक परमश्वरको जनसमुदाय संसार नहीं जानता अर्थात् मुझको अवतार रूप में आया Tmng: प्रत्यक्ष नहों होता क्योंकि ब्रह्म अपनी शब्द शक्ति से अपने नाना रूप बना लेता समझता है ( इसलिय ) जानता अर्थत : ক্রি সঁ পী কৃষ্তা  यह दुर्गा का पति है इसलिए इस श्लोक में कह रहा है T5ಾ7 ' अयम ೯ भजानाति अज्ञानी ভন্সন-সনেনালা आदि की तरह जन्म नहीं लेता | दुर्गा से समझता ह। लाकः जनसमुदाय  SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU श्रीभद भानावत नोतासर गीता ज्ञान दाता किसी के श्रीमद्धगवदीता सामने नहीं आता | = गीता अध्याय 7 श्लोक २५ सर्वस्य योगमायासमावृतः ٦٤ সক্ষাযা: লা্সিতানালি লীক্ষী সামভসন্সমসূ II ২৬ Il  मूढोउयं योगमायासमानृतः , सवस्य अहम , Telg: , मूढः, अयम न अभिजानाति लोकः, माम॰ अजम अव्ययम ।।  २५  तथा अपनो योगमायासे माम् यागमाया - छिपा हुआ  मैं योग माया से छिपा हुआ सबके प्रत्यक्ष नहीं होता अर्थात् अदृश्य रहता समावृतः अजम जन्मराहत अनिनाशी 31641 अव्ययम हूँ इसलिये मुझ जन्म न लेने वाले अविनाशी अटल भावको यह अज्ञानी सर्वस्य सवक परमश्वरको जनसमुदाय संसार नहीं जानता अर्थात् मुझको अवतार रूप में आया Tmng: प्रत्यक्ष नहों होता क्योंकि ब्रह्म अपनी शब्द शक्ति से अपने नाना रूप बना लेता समझता है ( इसलिय ) जानता अर्थत : ক্রি সঁ পী কৃষ্তা  यह दुर्गा का पति है इसलिए इस श्लोक में कह रहा है T5ಾ7 ' अयम ೯ भजानाति अज्ञानी ভন্সন-সনেনালা आदि की तरह जन्म नहीं लेता | दुर्गा से समझता ह। लाकः जनसमुदाय  SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU
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    श्रीभद भानावत नोतासर तप करने वाला श्रीमद्धगवद्गीता  अभिमानी होता है। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक 5 L शास्तनविरुद् घोर तप करनेवालोकी निन्दा। ] घोरं   तप्यन्ते अशास्त्रविहित तपा जनाः कामरागबलान्चिताः १। ५ दम्भाहङ्कारसयुक्ताः अशास्त्रविहितम , घोरम, तप्यन्ते, ये॰ तपः তনা:, कामरागबलान्वताः ।। ५ दम्भाहङ्कारसयुक्ताः आर हे अर्जन!- दम्भ और दम्भाहरारसवक्ता  अहकारस युक्त जनाः मनुष्य সামননিমিমািন (एव अशास्त्रनिरितम जो मनुष्य शास्त्रविधि से रहित केवल मन माना घोर तप को कवल मनः कल्पित ) कामना आर्सक्ति तपते हैं तथा पाखण्ड और अहंकार से युक्त एवं कामना के और बलके घारम घार कामणगयलान्विता ; अभिमानसे भी तपको  तपः आसक्ति और भक्ति बलके अभिमान से भी युक्त हैं।  तपते हॅ ( तथा ) युक्त हॅ॰ नप्यन्न SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~Lu श्रीभद भानावत नोतासर तप करने वाला श्रीमद्धगवद्गीता  अभिमानी होता है। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक 5 L शास्तनविरुद् घोर तप करनेवालोकी निन्दा। ] घोरं   तप्यन्ते अशास्त्रविहित तपा जनाः कामरागबलान्चिताः १। ५ दम्भाहङ्कारसयुक्ताः अशास्त्रविहितम , घोरम, तप्यन्ते, ये॰ तपः তনা:, कामरागबलान्वताः ।। ५ दम्भाहङ्कारसयुक्ताः आर हे अर्जन!- दम्भ और दम्भाहरारसवक्ता  अहकारस युक्त जनाः मनुष्य সামননিমিমািন (एव अशास्त्रनिरितम जो मनुष्य शास्त्रविधि से रहित केवल मन माना घोर तप को कवल मनः कल्पित ) कामना आर्सक्ति तपते हैं तथा पाखण्ड और अहंकार से युक्त एवं कामना के और बलके घारम घार कामणगयलान्विता ; अभिमानसे भी तपको  तपः आसक्ति और भक्ति बलके अभिमान से भी युक्त हैं।  तपते हॅ ( तथा ) युक्त हॅ॰ नप्यन्न SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~Lu
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    -shashvendra singh rajput
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    श्रीभद भानावत नोतासर इंद्रियों को हठ पूर्वक काबू करना श्रीमद्धगवद्गीता  भी शास्त्र विरुद्ध साधना है। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक १४ अध्याय 3u [ शारीरिक तपके लक्षण। ] शौचमार्जवम्।  देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शारीरं बह्मचर्यमहिंसा 3d II ? & নণ शोचम , देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनम् , आर्जवम् , शारीरम्, तपः, उच्यते I। १४ Il दैवी वृति वाले व्यक्ति अर्थात संत, ब्राह्मण , गुरु और ज्ञानीजनों का ब्रह्मचयम , आहसा नथा हे अर्जुन! - आदर पवित्रता आधीनी और अहिंसा यह शरीर सम्बन्धी ब्रह्मचर्य देवता ब्राह्मण  बह्मचर्यम् रहचर्य  देवद्विज- तप कहा जाता है। परन्तु सर्व शास्त्र विधि रहित है जिस कारण से गूरु * ओर  3117' ज्ञानीजनोंका  अहिसा अहिंसा - ( यह ) गुरुप्राज्ञपूजनम  क्योंकि गीता अध्याय १६ श्लोक २३ २४ में शास्त्र व्यर्थ साधना है शारारम शररसम्बन्धो 57 शौचम् পবিম্বনা;  विधि त्याग कर मनमाना आचरण करने को व्यर्थ बताया है आर्जवम् कहा जाता ह॰ उच्यते মংলেনা SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU श्रीभद भानावत नोतासर इंद्रियों को हठ पूर्वक काबू करना श्रीमद्धगवद्गीता  भी शास्त्र विरुद्ध साधना है। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक १४ अध्याय 3u [ शारीरिक तपके लक्षण। ] शौचमार्जवम्।  देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शारीरं बह्मचर्यमहिंसा 3d II ? & নণ शोचम , देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनम् , आर्जवम् , शारीरम्, तपः, उच्यते I। १४ Il दैवी वृति वाले व्यक्ति अर्थात संत, ब्राह्मण , गुरु और ज्ञानीजनों का ब्रह्मचयम , आहसा नथा हे अर्जुन! - आदर पवित्रता आधीनी और अहिंसा यह शरीर सम्बन्धी ब्रह्मचर्य देवता ब्राह्मण  बह्मचर्यम् रहचर्य  देवद्विज- तप कहा जाता है। परन्तु सर्व शास्त्र विधि रहित है जिस कारण से गूरु * ओर  3117' ज्ञानीजनोंका  अहिसा अहिंसा - ( यह ) गुरुप्राज्ञपूजनम  क्योंकि गीता अध्याय १६ श्लोक २३ २४ में शास्त्र व्यर्थ साधना है शारारम शररसम्बन्धो 57 शौचम् পবিম্বনা;  विधि त्याग कर मनमाना आचरण करने को व्यर्थ बताया है आर्जवम् कहा जाता ह॰ उच्यते মংলেনা SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU
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    ##satbakti sandesh
    श्रीभद भानावत नोतासर तब वह हठ योग करने वाले श्रीमद्धगवद्गीता  परमात्मा को भी परेशान करते हैं। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक 6 - भूतग्राममचेतसः  कर्शयन्तः शरीरस्थ मां चैवान्तःशरीरस्थं तान्विद्ध्यासुरनिश्चयान्।।६ शरोरस्थम , कशयन्तः , अचतसः , भूतग़्रामम, माम , अन्तःशरीरस्थम, तान, विद्धि आसुरनिश्चयान् ।।  [a, নথা ভা-  विष्णु, शरीर में रहने वाले प्राणियों के मुखिया शिव तथा कृश करनेबाले है  शरीरस्थम शरीररूपसे स्थित | कर्शयन्तः बह्मा , समुदायको १  भूतगरामम तान गणेश व प्रकृति को व मुझे तथा इसी प्रकार शरीर के हृदय कमल में সনানিমাকী अचेतमः और जीव के साथ रहने वाले पूर्ण परमात्मा को परेशान करने वाले अन्तःकरणमे अन्तःशरीरस्थम [ar' आसुर मुझ परमात्माको   आसुरनिश्चयान्  उनको अज्ञानियों को राक्षस स्वभाव वाले गीता अध्याय १३ जान स्वभाववाल fafa श्लोक १७ तथा अध्याय १८ श्लोक ६१ में कहा है कि पूर्ण परमात्मा जान। विशेष रूप से सर्व प्राणियों के हृदय में स्थित है SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU श्रीभद भानावत नोतासर तब वह हठ योग करने वाले श्रीमद्धगवद्गीता  परमात्मा को भी परेशान करते हैं। याातस गीता अध्याय १७ श्लोक 6 - भूतग्राममचेतसः  कर्शयन्तः शरीरस्थ मां चैवान्तःशरीरस्थं तान्विद्ध्यासुरनिश्चयान्।।६ शरोरस्थम , कशयन्तः , अचतसः , भूतग़्रामम, माम , अन्तःशरीरस्थम, तान, विद्धि आसुरनिश्चयान् ।।  [a, নথা ভা-  विष्णु, शरीर में रहने वाले प्राणियों के मुखिया शिव तथा कृश करनेबाले है  शरीरस्थम शरीररूपसे स्थित | कर्शयन्तः बह्मा , समुदायको १  भूतगरामम तान गणेश व प्रकृति को व मुझे तथा इसी प्रकार शरीर के हृदय कमल में সনানিমাকী अचेतमः और जीव के साथ रहने वाले पूर्ण परमात्मा को परेशान करने वाले अन्तःकरणमे अन्तःशरीरस्थम [ar' आसुर मुझ परमात्माको   आसुरनिश्चयान्  उनको अज्ञानियों को राक्षस स्वभाव वाले गीता अध्याय १३ जान स्वभाववाल fafa श्लोक १७ तथा अध्याय १८ श्लोक ६१ में कहा है कि पूर्ण परमात्मा जान। विशेष रूप से सर्व प्राणियों के हृदय में स्थित है SpntuaLeader Sant Rampal i Sant RampaJiManara ~LU
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