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#🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🔱शिवपुराण कथा📖 #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
सावन में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा - सम्पूर्ण विस्तृत व्याख्या
1. प्रस्तावना : सावन और शक्ति का अटूट संबंध
सावन का महीना केवल भगवान शिव का महीना नहीं है, यह शिव और शक्ति के महामिलन का महीना है। पुराणों में कहा गया है -
शिव: शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुम्।
न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि॥
अर्थात शिव शक्ति के साथ ही कुछ करने में समर्थ हैं। सावन में जब आकाश से वर्षा होती है, धरती हरी-भरी होती है, तो वह धरती माँ पार्वती का ही स्वरूप है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया एक-एक जल का लोटा, वास्तव में शक्ति को ही जागृत करता है।
इसलिए बुद्धिमान साधक सावन में केवल शिव की ही नहीं, शक्ति की भी आराधना करते हैं। और शक्ति की आराधना का सबसे सरल, सबसे तीव्र और सबसे गुप्त साधन है - **सिद्ध कुंजिका स्तोत्र**।
सावन में इस स्तोत्र का पाठ करना, बंद किस्मत के ताले को चाबी से खोलने जैसा है। इसीलिए इसे कुंजिका कहा गया है। कुंजिका माने चाबी।
2. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र क्या है? - उत्पत्ति की कथा
यह स्तोत्र कोई साधारण स्तोत्र नहीं है। यह रुद्रयामल तंत्र के गौरी तंत्र खंड में वर्णित है। यह स्वयं भगवान शिव के श्रीमुख से निकला हुआ है।
कथा इस प्रकार है - एक बार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा - हे महादेव! आपने दुर्गा सप्तशती की रचना तो कर दी, जो 700 श्लोकों में है। इसके पाठ से मनुष्य के सारे दुख दूर हो जाते हैं। परंतु कलियुग में मनुष्य के पास इतना समय नहीं होगा, न इतनी शुद्धता होगी, न इतना ज्ञान होगा कि वह विधि-विधान से कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान और न्यास के साथ सप्तशती का पाठ कर सके। तो उनके कल्याण के लिए कोई सरल उपाय बताइए।
तब करुणामय भगवान शिव ने मुस्कुराकर कहा - हे पार्वती! सुनो, मैं तुम्हें अत्यंत गुप्त और परम सिद्ध मंत्र बताता हूँ।
**शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्॥**
अर्थात - हे देवी! मैं तुम्हें कुंजिका स्तोत्र बताता हूँ। केवल इसके पाठ मात्र से दुर्गा सप्तशती के पाठ का सम्पूर्ण फल मिल जाता है। इसे करने वाले को कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास, अर्चन कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। यह स्वयं सिद्ध है।
इसी कारण इसे सिद्ध कुंजिका कहा जाता है।
3. सावन में इसकी शक्ति 100 गुना क्यों हो जाती है?
शास्त्र कहते हैं - "सावने साधक: योगी, साधना शीघ्र सिद्धिदा"
सावन में वातावरण में मौजूद जल तत्व और आकाश तत्व, मंत्रों को सिद्ध करने में सबसे ज्यादा सहायक होते हैं।
पहला कारण - शिव का डमरू और शक्ति का बीज: सिद्ध कुंजिका में जितने भी बीज मंत्र हैं - ऐं, ह्रीं, क्लीं, चामुण्डायै विच्चे - ये सभी डमरू की ध्वनि से ही उत्पन्न हुए हैं। सावन में शिव का डमरू सबसे ज्यादा बजता है। इसलिए इन बीज मंत्रों की शक्ति सावन में स्वतः जागृत हो जाती है।
दूसरा कारण - सोमवार का संयोग: सावन का हर सोमवार शिव-शक्ति मिलन का दिन है। मान्यता है कि सावन के एक सोमवार को कुंजिका का 9 बार पाठ करना, पूरी नवरात्रि के 9 दिन के पाठ के बराबर फल देता है। जो व्यक्ति सावन के 4 सोमवार लगातार 9-9 बार पाठ कर लेता है, उसकी कुंडली के सारे दोष शांत हो जाते हैं।
तीसरा कारण - ग्रहों की शांति: सावन में सूर्य कर्क राशि में होता है, जो जल तत्व की राशि है। इस समय चंद्रमा, जो मन का कारक है, बहुत चंचल होता है। लोग मानसिक अशांति, डर, नेगेटिविटी महसूस करते हैं। कुंजिका में स्थित "ह्रीं" बीज हृदय को शांत करता है और "क्लीं" आकर्षण और स्थिरता देता है। इसलिए यह मानसिक कवच बन जाता है।
चौथा कारण - कालसर्प, मंगल और शनि से मुक्ति: जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, मांगलिक दोष, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए सावन में कुंजिका से बड़ा कोई उपाय नहीं। क्योंकि इस स्तोत्र में माँ चामुंडा के साथ-साथ भगवान शिव का भी आशीर्वाद है।
पांचवा कारण - तंत्र बाधा से पूर्ण सुरक्षा: सावन में नकारात्मक शक्तियां भी सक्रिय हो जाती हैं। कई लोगों को लगता है कि घर में किसी ने कुछ कर दिया है, व्यापार बंध गया है। सिद्ध कुंजिका एक ऐसा अभेद्य कवच है जिसे कोई भी तांत्रिक प्रयोग भेद नहीं सकता। स्वयं माँ दुर्गा साधक के चारों ओर अग्नि का घेरा बना देती हैं।
4. सावन में सिद्ध कुंजिका पाठ की सम्पूर्ण विधि
सावन में इसका पाठ विधि-विधान से करने पर मनचाहा फल मिलता है।
क) समय का चयन:
सबसे उत्तम - ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे)
मध्यम उत्तम - प्रदोष काल (शाम 6 से 8 बजे)
सावन के सोमवार, शुक्रवार और अष्टमी को इसका विशेष फल है।
ख) स्थान और तैयारी:
घर के पूजा स्थान में जहाँ शिवलिंग रखा हो, वहाँ पूर्व या उत्तर मुख करके बैठें। लाल ऊनी आसन पर बैठें। अपने सामने माँ दुर्गा की फोटो या मूर्ति और एक छोटा शिवलिंग रखें। घी का एक दीपक माँ के सामने और तेल का दीपक शिवलिंग के पास जलाएं।
ग) संकल्प:
हाथ में गंगाजल, अक्षत, फूल और एक रुपये का सिक्का लेकर संकल्प करें:
"मम सर्व मनोकामना सिद्धयर्थम, सर्व बाधा, सर्व रोग, सर्व शत्रु, सर्व ग्रहदोष निवारणार्थम, अहं सावन मासे सिद्ध कुंजिका स्तोत्रस्य पाठं करिष्ये।"
घ) पाठ की संख्या:
साधारण मनोकामना के लिए - रोज 1 बार
धन और नौकरी के लिए - रोज 3 बार
शत्रु बाधा और कोर्ट केस के लिए - रोज 7 बार
अत्यंत तीव्र सिद्धि के लिए - रोज 9 बार और सावन के अंतिम दिन 108 बार का हवन।
ङ) पाठ का नियम:
पाठ को हमेशा मध्यम स्वर में करें, न बहुत जोर से, न मन में। पाठ के बीच में उठना, बात करना मना है। पाठ के बाद 3 बार "अपराध क्षमस्व मे" कहकर क्षमा याचना करें।
5. सावन में पाठ के 11 दिव्य लाभ जो जीवन बदल देते हैं
1. धन प्राप्ति और कर्ज से मुक्ति: इसमें लक्ष्मी बीज मंत्र हैं। सावन में इसके पाठ से घर में बरकत आती है। जो लोग कर्ज में डूबे हैं, उनका कर्ज उतरने लगता है।
2. शत्रु नाश और विजय: माँ बगलामुखी और चामुंडा का तेज इसमें है। ऑफिस में राजनीति, दुश्मन की साजिश, कोर्ट-कचहरी में तुरंत विजय मिलती है।
3. रोग नाश: इसमें कवच की शक्ति है। कैंसर, हार्ट, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, अनिद्रा, पैनिक अटैक जैसे रोगों में यह औषधि का काम करता है।
4. विवाह शीघ्र: जिन लड़कियों की शादी में देरी हो रही है, वे सावन में रोज शिवलिंग पर जल चढ़ाकर कुंजिका का पाठ करें तो 3 महीने में रिश्ता पक्का होने के हजारों प्रमाण हैं।
5. संतान सुख: निःसंतान दंपति सावन में पति-पत्नी दोनों मिलकर इसका पाठ करें तो योग्य संतान की प्राप्ति होती है।
6. भूत-प्रेत और नजर दोष से मुक्ति: छोटे बच्चों को अगर नजर लगती है, रात में डरते हैं, तो उनके सिरहाने कुंजिका का पाठ करके फूंक मारने से सारी बाधा दूर हो जाती है।
7. व्यापार वृद्धि: दुकान, फैक्ट्री में ग्राहक नहीं आ रहे तो सावन के पहले सोमवार को 27 बार पाठ करके दुकान में गंगाजल छिड़क दें, व्यापार दौड़ने लगता है।
8. मोक्ष प्राप्ति: यह भोग और मोक्ष दोनों देता है। गृहस्थ को गृहस्थी का सुख और साधु को मोक्ष देता है।
9. आकस्मिक दुर्घटना से बचाव: सावन में यात्रा अधिक होती है। घर से निकलने से पहले एक बार कुंजिका पढ़कर निकलने से दुर्घटना टल जाती है।
10. पितृ दोष और वास्तु दोष शांति: सावन में कुंजिका पाठ से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर का वास्तु दोष भी ठीक होने लगता है।
11. कुंडलिनी जागरण: यह साधकों के लिए कुंडलिनी जागृत करने का सबसे सुरक्षित मंत्र है।
6. सावधानियां - इन बातों का अवश्य ध्यान रखें
सावन में जिस दिन पाठ करें, उस दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल न करें।
बिना स्नान के पाठ न करें।
मासिक धर्म के दौरान महिलाएं 3 दिन पाठ न करें, चौथे दिन स्नान करके कर सकती हैं।
इस स्तोत्र को कभी भी अशुद्ध हाथों से न छुएं और इसका अपमान न करें।
पाठ के बाद कन्याओं को भोजन, सुहागिनों को श्रृंगार का सामान दान करने से फल हजार गुना बढ़ जाता है।
7. उपसंहार
याद रखिए, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र सिर्फ शब्द नहीं हैं, यह माँ जगदंबा की साँस है। जब आप सावन की रिमझिम बारिश में, शिवलिंग के सामने, दीपक जलाकर "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" बोलते हैं, तो कैलाश पर बैठी माँ पार्वती और शिव आपकी प्रार्थना सुनते हैं।
कलियुग में जब कोई रास्ता न दिखे, जब डॉक्टर, वकील, ज्योतिषी भी हाथ खड़े कर दें, तब यह एक छोटा सा स्तोत्र आपका सहारा बनता है।
इसलिए इस सावन प्रण लीजिए - चाहे कुछ भी हो जाए, रोज 5 मिनट निकालकर एक बार सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ अवश्य करेंगे। आप देखेंगे कि सावन खत्म होते-होते आपका जीवन कैसे बदल जाता है।
मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
जय माँ दुर्गा, हर हर महादेव, जय शिव शक्ति!