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- शम्भू शेखर झाजाऊँ कहाँ बताए दिल #जय राधे117
- शम्भू शेखर झाएक प्यार का नगमा है #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #जय राधे3517
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- sn vyas#जय श्री राधे निधिवन वृंदावन का वह रहस्यमयी और दिव्य स्थान है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ आज भी हर रात साक्षात भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी रास रचाते हैं। यहाँ की मान्यताएँ और कहानियाँ जितनी अद्भुत हैं, उतनी ही डराने वाली भी (उन लोगों के लिए जो नियमों का पालन नहीं करते)। निधिवन के दरवाजे शाम की आरती के बाद बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद यहाँ कोई भी मनुष्य, पशु या पक्षी नहीं रुकता। यहाँ तक कि बंदर, जो दिन भर यहाँ धमाचौकड़ी मचाते हैं, वे भी शाम होते ही वन छोड़कर चले जाते हैं। कहते हैं कि रात में यहाँ राधा-कृष्ण गोपियों संग रास करते हैं। स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, अगर कोई छिपकर इस रास को देखने की कोशिश करता है, तो वह या तो अंधा, बहरा या गूंगा हो जाता है, या उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है। लोगों का मानना है कि दिव्य रास को देखने की शक्ति सामान्य इंसानी आंखों में नहीं होती। टेढ़े-मेढ़े पेड़ (गोपियों का स्वरूप) निधिवन के पेड़ बहुत ही विचित्र हैं। सामान्यतः पेड़ों की टहनियाँ ऊपर की ओर जाती हैं, लेकिन यहाँ के पेड़ों की टहनियाँ नीचे की ओर झुकी हुई हैं और आपस में गुथी हुई हैं। मान्यता: ये पेड़ सामान्य पेड़ नहीं हैं, बल्कि श्रीकृष्ण की गोपियाँ हैं। रात के समय ये सभी पेड़ जीवित होकर राधा-कृष्ण के साथ नृत्य करते हैं और सुबह होते ही फिर से वृक्ष बन जाते हैं। निधिवन के अंदर एक छोटा सा मंदिर है जिसे 'रंग महल' कहा जाता है। यहाँ रोज़ रात को पुजारी जी: राधा रानी के लिए श्रृंगार का सामान (साड़ी, चूड़ी, चंदन)। दातुन और पानी का लोटा। बैठने के लिए सेज (बिस्तर) और पान रखते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जब सुबह मंदिर खोला जाता है, तो बिस्तर की चादर अस्त-व्यस्त मिलती है, पान चबाया हुआ मिलता है और श्रृंगार का सामान उपयोग किया हुआ लगता है। स्वामी हरिदास और बांके बिहारी का प्राकट्य निधिवन वही स्थान है जहाँ संगीत सम्राट स्वामी हरिदास जी अपनी कुटिया में बैठकर मधुर भजन गाते थे। उनके गायन से प्रसन्न होकर राधा-कृष्ण उनके सामने साक्षात प्रकट हो गए थे। स्वामी जी ने देखा कि प्रभु की छवि इतनी तेजमय है कि साधारण लोग इसे सहन नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु आप 'एक' रूप में यहीं बस जाएं। तब राधा-कृष्ण मिलकर एक विग्रह बन गए, जिन्हें आज हम 'बांके बिहारी जी' के नाम से जानते हैं। निधिवन में तुलसी के पौधे जोड़ों में हैं। कहते हैं कि यदि कोई यहाँ से एक पत्ता भी ले जाने की कोशिश करता है, तो वह भारी संकट में पड़ जाता है।1216
- sn vyasक्या राधा का वर्णन महाभारत में है? श्रीकृष्ण और श्री राधा दोनों ही भारत की संस्कृति में इस तरह रचे बसे हैं कि इन दोनों को अलग-अलग करके देखना एक प्रकार से असंभव है। किन्तु बहुत लोगों को ये जान कर हैरानी होगी कि राधा का वर्णन मूल व्यास महाभारत में है ही नहीं। तो क्या राधा जी का चरित्र काल्पनिक है? नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है। हाँ ये सत्य है कि उनका वर्णन मूल महाभारत में नहीं है किन्तु उनका चरित्र काल्पनिक नहीं है। आज बहुत सारे लोग श्रीकृष्ण के केवल उसी स्वरुप को जानते हैं जो महाभारत में लिखा हुआ है। अब चूंकि महर्षि व्यास ने श्रीकृष्ण और राधा जी का प्रसंग महाभारत में समाहित नहीं किया है इसी कारण लोगों को ऐसा भ्रम हो जाता है। तो फिर इन दोनों की इतनी कथाएं जो प्रचलित हैं वो कहाँ हैं? वो वास्तव में पुराणों में वर्णित हैं। राधा जी का सबसे विस्तृत वर्णन १८००० श्लोकों वाले श्री देवी भागवत पुराण में दिया गया है। इस पुराण में श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी वर्णन है और उनके साथ राधा के जीवन का पूर्ण प्रसंग भी हमें इसी ग्रन्थ में प्राप्त होता है। श्री देवी भागवत पुराण के अतिरिक्त भी राधा जी का वर्णन हमें ब्रह्मवैवर्त्य पुराण, पद्म पुराण, गीता गोविन्द, गोपाल तपणी उपनिषद, शिव पुराण, स्कन्द पुराण और नारदीय पुराण में मिलता है। किन्तु यदि हम राधा जी के सबसे सटीक और प्रामाणिक जानकारी की बात करें तो हमें देवी भागवत पुराण ही पढ़ना चाहिए। अब यहाँ पर एक प्रश्न आता है कि महाभारत की भांति ही सारे महापुराण भी तो महर्षि वेदव्यास ने ही लिखे हैं, फिर उन्होंने राधा जी का वर्णन महाभारत में क्यों नहीं किया? इसका उत्तर ये है कि महाभारत संसार के समस्त ज्ञान का एक निचोड़ है। इसीलिए कहा जाता है कि जो महाभारत में नहीं मिलता वो कही नहीं मिलता। किन्तु महाभारत में जो कुछ भी है उसके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए ही महर्षि वेदव्यास ने पुराणों की रचना की। मतलब महाभारत में जो संक्षेप में है या नहीं है, उसके विस्तृत वर्णन के लिए महापुराण हैं। और जो कुछ भी महापुराणों के लिए भी कम पड़ गया उसे व्यास और अन्य महर्षियों ने उप-पुराणों में समाहित किया है। प्रत्येक चीज का ऐसा विस्तृत वर्णन आपको संसार में हिन्दू धर्म के अतिरिक्त और कहीं नहीं मिलेगा। इसीलिए इसे समझने के लिए हमें पुराणों का मूल प्रयोजन समझने की आवश्यकता है। जय श्री राधा कृष्ण #राधे-राधे #जय श्री राधे1522
- शम्भू शेखर झान था मंजूर किस्मत को #जय राधे510
- हे राम तेरा ही सहारा#जय श्री राधे कृष्णा #जय श्री राधे राधे #राधे कृष्णा #🙏 🌄🌹 शुभ सबेरा #सुप्रभात2118
- Monu Singh#जय श्री राधे #जय श्री कृष्ण3330