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काल सर्प दोष के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए — गो-मेद या लह-सुनिया?
ज़्यादातर लोग नाग पंचमी पर सिर्फ पूजा करते हैं, लेकिन वैदिक ज्योतिष में काल सर्प दोष निवारण के लिए रत्न धारण का भी विशेष महत्व है। गो-मेद रा-हु को और लह-सुनिया के-तु को शांत करता है — और सत्रह अगस्त की नाग पंचमी इन्हें धारण करने का सबसे शुभ संयोग है। अगर आपकी कुण्ड-ली में काल सर्प दोष है तो यह वीडियो अभी सेव करें और उस व्यक्ति को भेजें जिसे इसकी ज़रूरत है। अपनी जन्म-पत्री के अनुसार सही रत्न जानने के लिए: trikalvaani.com
Q: काल सर्प दोष क्या है?
A: बृहत पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार, काल सर्प दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली के सभी सात ग्रह राहु और केतु की धुरी के एक ही ओर स्थित हों। यह जीवन में बाधाएं, देरी और मानसिक अशांति उत्पन्न कर सकता है।
Q: काल सर्प दोष के लक्षण क्या हैं?
A: काल सर्प दोष के सामान्य लक्षणों में बार-बार असफलता, सपने में सांप दिखना, करियर में अनावश्यक रुकावट, वैवाहिक जीवन में कलह और संतान सुख में देरी शामिल हैं। ये लक्षण राहु-केतु की दशा में अधिक तीव्र होते हैं।
Q: काल सर्प दोष के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
A: वैदिक ज्योतिष में राहु के लिए गोमेद (Hessonite Garnet) और केतु के लिए लहसुनिया (Cat's Eye) रत्न प्रमुख माने जाते हैं। इन्हें किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य की सलाह से, शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।
Q: नाग पंचमी 2026 पर काल सर्प दोष के क्या उपाय हैं?
A: नाग पंचमी 2026 (17 अगस्त, सोमवार) पर नाग देवता की पूजा, 'ॐ नाग देवताय नमः' मंत्र जप, त्र्यंबकेश्वर में काल सर्प दोष पूजा और गोमेद-लहसुनिया धारण विशेष फलदायी माने जाते हैं।
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