सोचिए—प्लास्टिक की बल्ले से शुरू हुआ सफर और बॉक्सिंग-डे के MCG में नाबाद 105 बनाकर टीम को संभालना; Nitish Kumar Reddy ने जिस धैर्य और तकनीक से यह किया वह प्रेरक है। उनके शब्द, "मैंने झंडे को सलामी दी", ने मैच की भावना को गहराई दी और दर्शकों से भावनात्मक कनेक्शन बनाया। पीछे की कहानी और भी असरदार है—उनके पिता ने करियर के लिए नौकरी छोड़ी और Nitish खुद कहते हैं कि "वो पहला इंसान थे जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया", ये संघर्ष-समर्थन का सशक्त उदाहरण है। तर्क/साइंस के हिसाब से देखें तो सफलता सिर्फ टैलेंट नहीं; मानसिक अनुकरण (mental simulation), deliberate practice और तनाव-इनोकुलेशन जैसे मनोवैज्ञानिक-न्यूरोबायोलॉजिकल तरीकों का परिणाम होती है—Nitish ने इन रणनीतियों का हवाला दिया और उपयोग भी किया। और सिर्फ खेल तक सीमित नहीं—ब्रांडिंग में भी जगह बनाई है; Hublot ने उन्हें friend of the brand चुनकर उनकी बहुमुखी सफलता को मान्यता दी। #NitishKumarReddy #MCGCentury #BoxingDay #TeamIndia #Cricket #Inspiration 🏏🇮🇳💯🙏🧠✨
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