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#कहता है रजनीश
कहता है रजनीश - नीले नीले अम्बर में , एक श्याम घटा थी छायी शायद वो मेरे मन को, व्याकुल करने को आयी ।। मैं देखके उसको तड़प उठा, मन विचलित मेरा यार हुआ  एक सुन्दर नैनों वाली से॰ मेरे मन को था प्यार हुआ ।। एक प्रेम सुन्दरी बचपन में,हर रोज मिला करती थी बैठ अकेले हम दोनों , नित नये खेल खेला करती थी ।। वो अपने मन की कहती मैं अपनी मन की कहता था | r में उसे खूब हंसाया करता था।।  खेल खेल आपस एक रात फिर श्याम घटा ने ऐसा कहर है ढाया हम दोनों फिर बिछड़ गये फिर उसे करीब न पाया ।। आज भी मन विचलित हो जाता श्याम घटा को स्यामशय प्रतिलिपि RANEESH SHUKLA नीले नीले अम्बर में , एक श्याम घटा थी छायी शायद वो मेरे मन को, व्याकुल करने को आयी ।। मैं देखके उसको तड़प उठा, मन विचलित मेरा यार हुआ  एक सुन्दर नैनों वाली से॰ मेरे मन को था प्यार हुआ ।। एक प्रेम सुन्दरी बचपन में,हर रोज मिला करती थी बैठ अकेले हम दोनों , नित नये खेल खेला करती थी ।। वो अपने मन की कहती मैं अपनी मन की कहता था | r में उसे खूब हंसाया करता था।।  खेल खेल आपस एक रात फिर श्याम घटा ने ऐसा कहर है ढाया हम दोनों फिर बिछड़ गये फिर उसे करीब न पाया ।। आज भी मन विचलित हो जाता श्याम घटा को स्यामशय प्रतिलिपि RANEESH SHUKLA - ShareChat