#अग्निशिला नवंबर 2025
संपादकीय
महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य का पर्व
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में राज्य की 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की. आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदान 2 दिसंबर 2025 को होगा, जबकि मतगणना 3 दिसंबर 2025 को की जाएगी. यह घोषणा न केवल चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत है, बल्कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की पुनर्स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है.
भारत के संविधान में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को लोकतंत्र का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है. नगर परिषदें और नगर पंचायतें नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधा जुड़ाव रखती हैं. सड़क, पानी, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं का दायित्व इन्हीं संस्थाओं पर होता है.
पिछले कई महीनों से इन संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, जिससे स्थानीय प्रशासनिक निर्णयों में ठहराव आ गया था. अब चुनाव की घोषणा के साथ जनता को पुनः अपने प्रतिनिधियों को चुनने का अवसर मिला है. यह नागरिक भागीदारी का वास्तविक उत्सव है. राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त दिनेश वाघमारे ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जनवरी 2026 से पहले सभी लंबित स्थानीय निकाय चुनाव सम्पन्न कराने का निर्देश दिया है. यही वजह है कि आयोग ने सक्रियता दिखाते हुए नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव कार्यक्रम का ऐलान किया है.
यह सुप्रीम कोर्ट के उस दृष्टिकोण का परिणाम है जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की नियमितता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. लोकतंत्र में “कार्यकाल समाप्ति के बाद प्रशासनिक नियंत्रण” लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है. इस सख्ती ने राज्य की चुनावी प्रक्रिया में नई ऊर्जा का संचार किया है. आयोग ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी. एक उम्मीदवार अधिकतम चार नामांकन दाखिल कर सकता है. साथ ही जाति वैधता प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा. यदि उम्मीदवार के पास फिलहाल प्रमाणपत्र नहीं है तो आवेदन की पावती देनी होगी, और जीतने की स्थिति में छह महीने के भीतर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा. यह कदम सामाजिक न्याय और पारदर्शिता, दोनों की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है. इससे उम्मीदवारों की पात्रता पर कोई संदेह नहीं रहेगा और जाति प्रमाणन प्रक्रिया में भी अनुशासन आएगा.
नगर परिषदों में 20 से 75 सदस्य तथा नगर पंचायतों में 17 सदस्य चुने जाएंगे. मतदाताओं को बहुसदस्यीय प्रणाली के तहत दो या तीन उम्मीदवारों के लिए मतदान करना होगा. यह प्रणाली अपेक्षाकृत जटिल है, जिसके लिए मतदाताओं में जागरूकता और प्रशिक्षण की आवश्यकता है. अक्सर देखा गया है कि मतदाता बहुसदस्यीय प्रणाली को सही तरह नहीं समझ पाते, जिससे मत रद्द होने की संभावना बढ़ जाती है. इस बार आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदाताओं को पर्याप्त जानकारी और सहायता उपलब्ध हो.
इस चुनाव में लगभग 86,859 सदस्य और 288 अध्यक्ष चुने जाएंगे. यह एक विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जिसमें हजारों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे. राज्य के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में यह चुनाव सीधा जनसंवाद का माध्यम बनता है. जहां जातीय समीकरण, स्थानीय विकास कार्य और व्यक्तिगत प्रभाव सभी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. राजनीतिक दलों के लिए भी यह चुनाव 2029 के विधान सभा चुनावों से पहले “जमीनी जनमत सर्वेक्षण” साबित हो सकता है. स्थानीय निकायों के परिणाम अक्सर आने वाले बड़े चुनावों की दिशा तय करते हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति में यह चुनाव केवल सत्ता या प्रशासनिक नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आस्था का उत्सव है. स्थानीय स्वराज्य संस्थाएं ही नागरिकों के जीवन में शासन की वास्तविक उपस्थिति हैं. राज्य चुनाव आयोग ने पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता का समन्वय करते हुए जो प्रक्रिया आरंभ की है, वह निश्चित ही सराहनीय है. अब यह जिम्मेदारी मतदाताओं की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें और ईमानदार, जवाबदेह प्रतिनिधियों का चयन करें. लोकतंत्र केवल मतदान का अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का दायित्व भी है और यही दायित्व निभाने का समय अब आ गया है.
अनिल गलगली
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