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#📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #अमित राज श्रीवास्तव
📖 कविता और कोट्स✒️ - 66 पलकों पर ठहरी नमी अब शब्द नहीं खोजती , बस रिसती है अनकहे अपराध-भाव की तरह। भीतर का शोर इतना भारी हा गया है कि मौन भी टूटकर गिरता है चूरचूर। अमित राज श्रीवास्तव PAGE 66 पलकों पर ठहरी नमी अब शब्द नहीं खोजती , बस रिसती है अनकहे अपराध-भाव की तरह। भीतर का शोर इतना भारी हा गया है कि मौन भी टूटकर गिरता है चूरचूर। अमित राज श्रीवास्तव PAGE - ShareChat