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#✍ कविता 📓 #kavita padhi log
✍ कविता 📓 - पक्की स्याही की तरह किसी दरिया की किनारों से लडाई की तरह कभी समंदर है और बातें गहराई की तरह। अँधेरा छुपा हुआ है दिल में मुजरिम बनकर उजाले ढूँढते हैं मुझको सिपाही की तरह। पीछा छोड़ता नहीं है एक हँसता हुआ चेहरा सदाएँ होती हैं अच्छी-बुरी कमाई की तरह। एक तमन्ना है, दिल से कभी जाती ही नहीं दिल को बहला देती है शहनाई की तरह। हम-्नवाई ना भी सही, कोई ज़ंजीर ही सही निभाते रहना आशनाई की तरह। दुश्मनी लिखा जो नाम है लकीरों में, मिटाएँ कैसे मोहब्बत होती है पक्की स्याही की तरह। -डॉ कुमार तरुण (समयज्ञ) पक्की स्याही की तरह किसी दरिया की किनारों से लडाई की तरह कभी समंदर है और बातें गहराई की तरह। अँधेरा छुपा हुआ है दिल में मुजरिम बनकर उजाले ढूँढते हैं मुझको सिपाही की तरह। पीछा छोड़ता नहीं है एक हँसता हुआ चेहरा सदाएँ होती हैं अच्छी-बुरी कमाई की तरह। एक तमन्ना है, दिल से कभी जाती ही नहीं दिल को बहला देती है शहनाई की तरह। हम-्नवाई ना भी सही, कोई ज़ंजीर ही सही निभाते रहना आशनाई की तरह। दुश्मनी लिखा जो नाम है लकीरों में, मिटाएँ कैसे मोहब्बत होती है पक्की स्याही की तरह। -डॉ कुमार तरुण (समयज्ञ) - ShareChat