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hardoi - जिन्हें फ़िक़र थी कल की रोए ೩ रात भर जिन्हें यकीन था रब पर सोए वे रात भर. लोग शौक से कहते है कोई किसी का नहीं, लेकिन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए परखो तो कोई अपना नही समझो तो कोई पराया नहीं Suneeta singh जिन्हें फ़िक़र थी कल की रोए ೩ रात भर जिन्हें यकीन था रब पर सोए वे रात भर. लोग शौक से कहते है कोई किसी का नहीं, लेकिन कोई यह नहीं सोचता की हम किसके हुए परखो तो कोई अपना नही समझो तो कोई पराया नहीं Suneeta singh - ShareChat