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#गुलज़ार साहब के शायरी #गुलज़ार साहब के अलभाज #गुलज़ार साहब की शायरी #📚यादो का सफर📝 #🍁शायर मैं अल्फ़ाज तुम📘🍁
गुलज़ार साहब के शायरी - gulzarkishayar खामोशी ओढ ली हमने ताकि रुतबा मोहब्बत का न दागदार हो. ( 55" और तृम समझते हो हम बेन्लब्ज़ हो गये... gulzarkishayar खामोशी ओढ ली हमने ताकि रुतबा मोहब्बत का न दागदार हो. ( 55" और तृम समझते हो हम बेन्लब्ज़ हो गये... - ShareChat