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#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - चूम लेता हूँ हर मुश्किलों को मैं अपना मानकर, जिँदगी कैसी भी है आखिर है तो मेरी ही...! गुलज़ार चूम लेता हूँ हर मुश्किलों को मैं अपना मानकर, जिँदगी कैसी भी है आखिर है तो मेरी ही...! गुलज़ार - ShareChat