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#sachi kahani ek aisi kahani jo dil ko dehla de 🥹🥺😔🙏
sachi kahani - किसी ने नहीं पता किया सुनी एक ऐसी आज किक्या है रहस्य इसके कहानी जो कलयुग को पीछे??? दर्शाती है है इसरमें हे कुछ और फिर कुछ समय बाद ऐसी चींखें जो दिल को कल्पना भी याद बनकर दहलती हे॰ एक रह जाती है॰ मां जिसकी दो बेटियां संभली नहीं थी अभी भगवान को प्यारी हो चंचल के,के सोतेली मां जाती है कहते हैं पिता भी आ जाती है॰n संसार होता हे॰ लेकिन इस अत्याचार शुरू हुआ और पिता के कारण बेटियोंका बेटी नौकरानी बन जाती हे संसारही खतम हो जाता शारीरिक और मानसिक মাচ্চা মাথ ও০া মং प्रताड़ना के कारण  , से पिता से जिम्मेदारी नहीं चंचल अब बौखला सी उठाई जाती हे॰ ullri B," मोज उड़ाता अपने में सौतेली मां का सौतेलापन নঠিয়া এনীনী নন আনী हावी होने लगा था, आश्चर्य हैं॰. कोई नहीं था उनका तो इस बात का हे॰, सगा दुनिया में .तो ' थाम कर पिता भी केसे सोतेला हो एक दूसरे का हाथ दोनों  जाता है॰ आंसुओं में ही सिमट कर ओरफिर अंत में एक रह जाती हें खोफनाक घड़ी फिरआती समय से पहले खोया हे॰, अपने सगे पिता के बचपन और बचपना भी हार्थों बेटी मौत के घाट मर जाती हे॰ उतारी जाती हे!!!! नाम थे उनके बड़े अनोखे चीख उठी चंचल की कल्पना और चंचल" आवाज, रूह कांप ग्ई पर उनके जीवन में ये शब्द उसकी  केवल,, शब्द बनकर ही बड़ी बेरहमी से जब वो इन 36 uIId గీu दरिंदों की शिकार बन किसी से कुछ वो न कहती எளி Bmm క్డీ पर आंखे सब कुछ कहती हाय हाय करने सब आए पर आवाज किसी से नहीं हैंn उठाई जाती है॰ एक दिन ऐसा मोड़ आया फिर अपनी मां और बहन कि चंचल सहम सी जाती की तरह चंचल भी कहानी ৪,,নান দলী নীএনা বলা নন আনীট সানা পিনা যানী कल्पना की सांसे रुक भगवान फिर क्यूं ऐसे ডনী ;!!! भगवान में इंसानियत ही Wuldil ~సuI किसी ने नहीं पता किया सुनी एक ऐसी आज किक्या है रहस्य इसके कहानी जो कलयुग को पीछे??? दर्शाती है है इसरमें हे कुछ और फिर कुछ समय बाद ऐसी चींखें जो दिल को कल्पना भी याद बनकर दहलती हे॰ एक रह जाती है॰ मां जिसकी दो बेटियां संभली नहीं थी अभी भगवान को प्यारी हो चंचल के,के सोतेली मां जाती है कहते हैं पिता भी आ जाती है॰n संसार होता हे॰ लेकिन इस अत्याचार शुरू हुआ और पिता के कारण बेटियोंका बेटी नौकरानी बन जाती हे संसारही खतम हो जाता शारीरिक और मानसिक মাচ্চা মাথ ও০া মং प्रताड़ना के कारण  , से पिता से जिम्मेदारी नहीं चंचल अब बौखला सी उठाई जाती हे॰ ullri B," मोज उड़ाता अपने में सौतेली मां का सौतेलापन নঠিয়া এনীনী নন আনী हावी होने लगा था, आश्चर्य हैं॰. कोई नहीं था उनका तो इस बात का हे॰, सगा दुनिया में .तो ' थाम कर पिता भी केसे सोतेला हो एक दूसरे का हाथ दोनों  जाता है॰ आंसुओं में ही सिमट कर ओरफिर अंत में एक रह जाती हें खोफनाक घड़ी फिरआती समय से पहले खोया हे॰, अपने सगे पिता के बचपन और बचपना भी हार्थों बेटी मौत के घाट मर जाती हे॰ उतारी जाती हे!!!! नाम थे उनके बड़े अनोखे चीख उठी चंचल की कल्पना और चंचल" आवाज, रूह कांप ग्ई पर उनके जीवन में ये शब्द उसकी  केवल,, शब्द बनकर ही बड़ी बेरहमी से जब वो इन 36 uIId గీu दरिंदों की शिकार बन किसी से कुछ वो न कहती எளி Bmm క్డీ पर आंखे सब कुछ कहती हाय हाय करने सब आए पर आवाज किसी से नहीं हैंn उठाई जाती है॰ एक दिन ऐसा मोड़ आया फिर अपनी मां और बहन कि चंचल सहम सी जाती की तरह चंचल भी कहानी ৪,,নান দলী নীএনা বলা নন আনীট সানা পিনা যানী कल्पना की सांसे रुक भगवान फिर क्यूं ऐसे ডনী ;!!! भगवान में इंसानियत ही Wuldil ~సuI - ShareChat