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#consciousness #vedanta 📙🇨🇮🌾⤵️ गीता अध्याय 18, श्लोक 62 “हे अर्जुन! तू सब प्रकार से उस परम ईश्वर की ही शरण में जा। उस परमपिता परमात्मा की कृपा से ही तू परम शांति और शाश्वत स्थान- सतलोक (स्थान-धाम) को प्राप्त होगा”। ’सब प्रकार से’ का अर्थ कोई अन्य पूजा नहीं करना बल्कि मन-कर्म-वचन से केवल एक भगवान में विश्वास रखना है। देखें प्रतिदिन साधना टीवी पर शाम 7:30 बजे से 8:30 तक। #reincarnation #meditation #lordkrishna #kaal #brahm #om #dailygita #sanatandharma #SantRampalJiMaharaj
consciousness - गीता का गूढ़ ऱहस्य प्रश्नः- काल भगवान अर्थात ब्रह्म अविनाशी है या जन्मता=्सरता है? उत्तरः - जन्मता -मरता है। अध्याय 4 का श्लोक 5 लिए देखें- प्रमाण के (भगवान उवाच) बहूनि मे॰ व्यतीतानि जन्मानि तवच अर्जुन श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 2 श्लोक १२, तानि अहम् वेद सर्वाणि न त्वम वेत्थ परन्तप।।५।। गीता अध्याय 4 श्लोक 5 अनुवादः ( परन्तप ) हे परन्तप (अर्जुन) अर्जुन। (जन्मानि) मेरे (च) और (तव) तेरे (बहूनि) बहुतःसे  गीता अध्याय १० श्लोक 2 (व्यतीतानि) हो चुके हें। (तानि) उन (सर्वाणि) जन्म सबको (त्वम) तू (न) नहीं (वेत्थ) जानता किंतु में गीता ज्ञान दाता स्वयं स्वीकार करता है कि (अहम) में (वेद ) जानता हू। (५) है, मैं अविनाशी नहीं हूँ! मेरी भी जन्म व मृत्यु होती हिन्दीः हे परन्तप अर्जुन! मेरे ओर तेरे बहुतः से जन्म  हो चुके हें। उन सबको  किंतु र्मे जानता  तू न्ही जानता संत रामपाल जी महाराज द्वारा ख्वुलासा 7 निःशुल्क पायें  पवित्र पुस्तक  অপনা নাস, সুয দলা সত ज्ञान गगा +91 7496801823 11 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ गीता का गूढ़ ऱहस्य प्रश्नः- काल भगवान अर्थात ब्रह्म अविनाशी है या जन्मता=्सरता है? उत्तरः - जन्मता -मरता है। अध्याय 4 का श्लोक 5 लिए देखें- प्रमाण के (भगवान उवाच) बहूनि मे॰ व्यतीतानि जन्मानि तवच अर्जुन श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 2 श्लोक १२, तानि अहम् वेद सर्वाणि न त्वम वेत्थ परन्तप।।५।। गीता अध्याय 4 श्लोक 5 अनुवादः ( परन्तप ) हे परन्तप (अर्जुन) अर्जुन। (जन्मानि) मेरे (च) और (तव) तेरे (बहूनि) बहुतःसे  गीता अध्याय १० श्लोक 2 (व्यतीतानि) हो चुके हें। (तानि) उन (सर्वाणि) जन्म सबको (त्वम) तू (न) नहीं (वेत्थ) जानता किंतु में गीता ज्ञान दाता स्वयं स्वीकार करता है कि (अहम) में (वेद ) जानता हू। (५) है, मैं अविनाशी नहीं हूँ! मेरी भी जन्म व मृत्यु होती हिन्दीः हे परन्तप अर्जुन! मेरे ओर तेरे बहुतः से जन्म  हो चुके हें। उन सबको  किंतु र्मे जानता  तू न्ही जानता संत रामपाल जी महाराज द्वारा ख्वुलासा 7 निःशुल्क पायें  पवित्र पुस्तक  অপনা নাস, সুয দলা সত ज्ञान गगा +91 7496801823 11 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat