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#⚓ऋषि पंचयी⚓ #⚓रोज एक नया दिवस⚓ #⚓भक्तिसागर⚓ #👁️ ठनठनिया-जंक्शन 👁️ #⚓ SELFISH-AGENDA ⚓
⚓ऋषि पंचयी⚓ - ऋषि पंचमी कथा ೧೨೦೦ న  विदर्भ देश में एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था. उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी,  एक पुत्री दो था॰ उस ब्राह्मण के एक पुत्र और  নিমকা নাস  सुशीला संतान थी॰ विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का से कुछ विवाह कर दिया॰ दैवयोग  दिनों बाद वह विधवा हो गई॰ दुखी ब्राह्मण दम्पति बनाकर रहने लगे॰ एक दिन ब्राह्मण कन्या कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया॰ कन्या ने सारी बात मां से कही . मां ने पति से सब कहते हुए पूछा - प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है? ब्राह्मण ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया - पूर्व जन्म में भी यह कन्या रजस्वला होते ही बर्तन . ब्राह्मणी इसने छू दिए थे. इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा -देखी ऋषि पंचमी  का व्रत नहीं किया॰ इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़ हैं॰ धर्म - शास्त्रों की मान्यता है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी , दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है॰ दूसरे  वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है॰. यदि यह शुद्ध मन से अब भी दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी . पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया॰ व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई॰ अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय का भोग मिला सुखों  NEs & ऋषि पंचमी कथा ೧೨೦೦ న  विदर्भ देश में एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था. उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी,  एक पुत्री दो था॰ उस ब्राह्मण के एक पुत्र और  নিমকা নাস  सुशीला संतान थी॰ विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का से कुछ विवाह कर दिया॰ दैवयोग  दिनों बाद वह विधवा हो गई॰ दुखी ब्राह्मण दम्पति बनाकर रहने लगे॰ एक दिन ब्राह्मण कन्या कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया॰ कन्या ने सारी बात मां से कही . मां ने पति से सब कहते हुए पूछा - प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है? ब्राह्मण ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया - पूर्व जन्म में भी यह कन्या रजस्वला होते ही बर्तन . ब्राह्मणी इसने छू दिए थे. इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा -देखी ऋषि पंचमी  का व्रत नहीं किया॰ इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़ हैं॰ धर्म - शास्त्रों की मान्यता है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी , दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है॰ दूसरे  वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है॰. यदि यह शुद्ध मन से अब भी दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी . पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया॰ व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई॰ अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय का भोग मिला सुखों  NEs & - ShareChat