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राधे राधे #जय श्री
जय श्री - IIश्रीहरिः Il जो कुछ सुख दुःखादि आकर प्राप्त हो उसको भगवान् की आज्ञा से प्राप्त हुआ मानकर आनन्द के सहित स्वीकार करना भगवान् की शरण है। (परमार्थसूत्र संग्रह, पृष्ठ संख्या ३४) श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका  IIश्रीहरिः Il जो कुछ सुख दुःखादि आकर प्राप्त हो उसको भगवान् की आज्ञा से प्राप्त हुआ मानकर आनन्द के सहित स्वीकार करना भगवान् की शरण है। (परमार्थसूत्र संग्रह, पृष्ठ संख्या ३४) श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका - ShareChat