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2 अक्टूबर — सिर्फ जन्मदिन नहीं, यह अहिंसा और सत्य का ग्लोबल रिमाइंडर है; भारत में इसे राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है। यही दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा International Day of Non-Violence के रूप में भी चिन्हित है, जिससे गांधी का संदेश विश्वव्यापी बनता है। एक चौंकाने वाला तथ्य: महात्मा गांधी को पाँच बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था पर वह पुरस्कार उन्हें नहीं मिला — इतिहासकारों ने इसे बड़ी चूक माना है। तर्क/साइंस की बात करें तो आधुनिक शोध दिखाते हैं कि अहिंसात्मक नागरिक प्रतिरोध (Gandhi के satyagraha जैसे) सशस्त्र संघर्षों की तुलना में अधिक सफल और दीर्घकालिक परिवर्तन लाते हैं; Erica Chenoweth व Maria Stephan के डेटा से पता चलता है कि अगर किसी आंदोलन में लगभग 3.5% आबादी सक्रिय रूप से शामिल हो जाए तो वह सामान्यतः क्रिटिकल-मास बनकर बदलाव ला देता है — मतलब गांधी की नीति नैतिक भी थी और रणनीतिक (effectively evidence-based) भी। और जैसे गांधी ने लिखा/कहने के रूप में दर्ज है: "कमज़ोर कभी क्षमा नहीं कर सकते; क्षमा करना सशक्त लोगों का गुण है।" (Young India, 2 April 1931)। आज स्क्रीन पर एक छोटा-सा अहिंसा-चुनाव करके ही आप बड़ा असर कर सकते हैं — अपने शब्दों, खरीददारी और रोज़मर्रा के फैसलों में सत्य और अहिंसा चुनें और यह संदेश फैलाइए 🕊️✨🇮🇳 #गांधीजयंती #GandhiJayanti #अहिंसा #NonViolence #Truth 🕊️ @गर्ल की ठुकाई @पापा की परी @नये सोच की ओर @ये बोल की ग बाळा #गांधी जयंती की शुभकामनाएं #गांधी जयंती की शुभकामनाएं🙏🙏 #💐 गांधी जयंती शुभकामनाएं #🔥 गांधी जयंती की शुभकामनाएं
गांधी जयंती की शुभकामनाएं - षषीची निमत = षषीची निमत = - ShareChat