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હવનનું મહત્વ #ધુપબતી #ગોબર #ગૌશાળા #ગૌશાળા #ધૂપ
ગૌશાળા - जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को मिला पेटेंट अब जीवाणु जनित बीमारियों का हवन' से इलाज संभव 'बैक्टीरिया इफेक्ट ऑफ चन्द्र प्रकाश जोशी मेडिसिनल स्मॉक' पर patrika com हवन जीवाणु  হাঙ ক্িমা থা | जनित रोग एवं अजमेर. हवन की उपचार के लिए हवन' का धुआं सामग्री एवं एवं गंध रामबाण का काम करती औषधियों का गुणवत्तापूर्ण सामग्री ೯( एवं पेटेंट मिल गया औषधियों से किया गया हवन हमारे है। जीवाणु आसपास के वातावरण में उपलब्ध जनित बीमारियों के निदान के जीवाणुओं को खत्म कर देता है लिए 'हवन ' कारगर साबित हुआ एवं व्यक्ति की इम्यूनिटी पावर को विस्तृत 8/ 3/4 5##` अनुसंधान बढ़ाता है। यह खुलासा अजमेर के किया जा रहा है। नेहरू   मेडिकल जवाहर লল पहली डों. विजयलता रस्तोगी , कॉलेज में बार माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी , से हवन' पर किए गए शोध में हुआ  जेएलएन मेडिकल विभाग, अजमेर हैं। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल ३० लाख रुपए का बजट भी जारी रिसर्च (आईसीएमआर ) की ओर किया गया है। माइक्रोबायोलॉजी से हवनृ' पर शोध के बाद फरवरी विभाग में हवन के लिए अलग से २०२३ में हवन की संबंधित सामग्री हवन से पूर्व एवं आदि का पेटेंट भी जारी कर दिया कक्ष बनाया गया। बाद में बैक्टीरिया के सैंपल लिए गया है। आईसीएमआर की ओर से কসিক্ল इसके कॉलेज সভিন্কল जेएलएन बाद गए। एनालिसिस किया गया। सैंपल की अजमेर प श्रीराम इंस्टीट्यूट के टेस्टिंग की गई। संयुक्त तत्वावधान में किए गए इसके बाद स्पष्ट हुआ कि रोगकारक बैक्टीरिया पर शोध को प्रमाणित किया गया है। असरदार है। लिए  विस्तृत अनुसंधान के करीब धुआं ৪পন কা जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को मिला पेटेंट अब जीवाणु जनित बीमारियों का हवन' से इलाज संभव 'बैक्टीरिया इफेक्ट ऑफ चन्द्र प्रकाश जोशी मेडिसिनल स्मॉक' पर patrika com हवन जीवाणु  হাঙ ক্িমা থা | जनित रोग एवं अजमेर. हवन की उपचार के लिए हवन' का धुआं सामग्री एवं एवं गंध रामबाण का काम करती औषधियों का गुणवत्तापूर्ण सामग्री ೯( एवं पेटेंट मिल गया औषधियों से किया गया हवन हमारे है। जीवाणु आसपास के वातावरण में उपलब्ध जनित बीमारियों के निदान के जीवाणुओं को खत्म कर देता है लिए 'हवन ' कारगर साबित हुआ एवं व्यक्ति की इम्यूनिटी पावर को विस्तृत 8/ 3/4 5##` अनुसंधान बढ़ाता है। यह खुलासा अजमेर के किया जा रहा है। नेहरू   मेडिकल जवाहर লল पहली डों. विजयलता रस्तोगी , कॉलेज में बार माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी , से हवन' पर किए गए शोध में हुआ  जेएलएन मेडिकल विभाग, अजमेर हैं। इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल ३० लाख रुपए का बजट भी जारी रिसर्च (आईसीएमआर ) की ओर किया गया है। माइक्रोबायोलॉजी से हवनृ' पर शोध के बाद फरवरी विभाग में हवन के लिए अलग से २०२३ में हवन की संबंधित सामग्री हवन से पूर्व एवं आदि का पेटेंट भी जारी कर दिया कक्ष बनाया गया। बाद में बैक्टीरिया के सैंपल लिए गया है। आईसीएमआर की ओर से কসিক্ল इसके कॉलेज সভিন্কল जेएलएन बाद गए। एनालिसिस किया गया। सैंपल की अजमेर प श्रीराम इंस्टीट्यूट के टेस्टिंग की गई। संयुक्त तत्वावधान में किए गए इसके बाद स्पष्ट हुआ कि रोगकारक बैक्टीरिया पर शोध को प्रमाणित किया गया है। असरदार है। लिए  विस्तृत अनुसंधान के करीब धुआं ৪পন কা - ShareChat