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#श्री रामचरित मानस 🚩 #🌹🙏श्री रामचरित मानस🙏🌹
श्री रामचरित मानस 🚩 - हरि शरणं '्तुलसी' काया खेत है, मनसा भयौ किसान पाप-पुन्य दोउ बीज हैं , बुवै सो लुनै निदान गोस्वामी जी कहते हैं कि शरीर मानो खेत है, मन मानो किसान है। जिसमें यह किसान पाप और पुण्य रूपी दो प्रकार के बीजों को बोता है। जैसे बीज बोएगा वैसे ही इसे अंत में फल काटने को मिलेंगे। भाव यह है कि यदि मनुष्य शुभ कर्म करेगा तो उसे शुभ फल मिलेंगे और यदि पाप कर्म करेगा तो उसका फल भी बुरा ही मिलेगा। दोहावली, गोस्वामी तुलसीदासजी  हरि शरणं '्तुलसी' काया खेत है, मनसा भयौ किसान पाप-पुन्य दोउ बीज हैं , बुवै सो लुनै निदान गोस्वामी जी कहते हैं कि शरीर मानो खेत है, मन मानो किसान है। जिसमें यह किसान पाप और पुण्य रूपी दो प्रकार के बीजों को बोता है। जैसे बीज बोएगा वैसे ही इसे अंत में फल काटने को मिलेंगे। भाव यह है कि यदि मनुष्य शुभ कर्म करेगा तो उसे शुभ फल मिलेंगे और यदि पाप कर्म करेगा तो उसका फल भी बुरा ही मिलेगा। दोहावली, गोस्वामी तुलसीदासजी - ShareChat