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rss - बौद्धिक पत्रक नवम्बर-दिसम्बर स्वयं अब जागकर हमको, जगाना देश है अपना जगाना देश है अपना, 891 & 314 //&./1 जगाना हमारे देश की मिट्टी, हमें प्राणों से प्यारी है हमारी है ೫೫ ಹ 31೫ `1೯ ಕ್ತ್ತಾ श्रद्धा  परम स्वभाषा है हमें प्यारी, ओ प्यारा देश है अपना ।। 1 || देश है अपना, जगाना देश है अपना जगाना fಷ' ম মীন কা है अब नहीं कोई॰ गहन समय समय है एक होने का, न मतभेदों में खोने का बढ़े बल राष्ट्र का जिससे, वो करना मेल है अपना ।।२।। जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना हिंदू सक्रिय भाव भरने का অনন ৪ী মাঠিন जगाने राष्ट्र की भक्ति, उत्तम कार्य करने का समुन्नत राष्ट्र हो भारत, यही उद्देश्य है अपना ।।३।। देश है अपना, जगाना देश है अपना जगाना सुभाषित  % अवमानं पुरस्कृत्य मानं कृत्वा तु पृष्ठतः स्वकार्य साध्येत् प्राज्ञः कार्यध्वंसो हि मूर्खता ।। बुद्धिमान मनुष्य अपमान को आगे रखकर और अर्थ सिद्ध सम्मान को पीछे रखकर अपने कार्य को ಹ क्योंकि कार्य को नष्ट करना ही है मूर्खता || अमृत वचन * संगठित जीवन निर्माण करने हेतु एक ध्येय एक उपास्य तथा एक लक्ष्य होना आवश्यक है कोई भी तात्कालिक, सामयिक लक्ष्य सामने रखकर समाज को संगठित नहीं किया जा सकता प.पू॰ श्री गुरूजी बौद्धिक पत्रक नवम्बर-दिसम्बर स्वयं अब जागकर हमको, जगाना देश है अपना जगाना देश है अपना, 891 & 314 //&./1 जगाना हमारे देश की मिट्टी, हमें प्राणों से प्यारी है हमारी है ೫೫ ಹ 31೫ `1೯ ಕ್ತ್ತಾ श्रद्धा  परम स्वभाषा है हमें प्यारी, ओ प्यारा देश है अपना ।। 1 || देश है अपना, जगाना देश है अपना जगाना fಷ' ম মীন কা है अब नहीं कोई॰ गहन समय समय है एक होने का, न मतभेदों में खोने का बढ़े बल राष्ट्र का जिससे, वो करना मेल है अपना ।।२।। जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना हिंदू सक्रिय भाव भरने का অনন ৪ী মাঠিন जगाने राष्ट्र की भक्ति, उत्तम कार्य करने का समुन्नत राष्ट्र हो भारत, यही उद्देश्य है अपना ।।३।। देश है अपना, जगाना देश है अपना जगाना सुभाषित  % अवमानं पुरस्कृत्य मानं कृत्वा तु पृष्ठतः स्वकार्य साध्येत् प्राज्ञः कार्यध्वंसो हि मूर्खता ।। बुद्धिमान मनुष्य अपमान को आगे रखकर और अर्थ सिद्ध सम्मान को पीछे रखकर अपने कार्य को ಹ क्योंकि कार्य को नष्ट करना ही है मूर्खता || अमृत वचन * संगठित जीवन निर्माण करने हेतु एक ध्येय एक उपास्य तथा एक लक्ष्य होना आवश्यक है कोई भी तात्कालिक, सामयिक लक्ष्य सामने रखकर समाज को संगठित नहीं किया जा सकता प.पू॰ श्री गुरूजी - ShareChat