सोचकर चौंका देने वाली बात: रोना सिर्फ कमजोरी नहीं — ये हमारे दिमाग और बॉडी की एक समझदार भाषा है; इमोशनल आँसुओं में तनाव-हॉर्मोन्स (जैसे ACTH) और प्रोटीन अधिक पाए जाते हैं, इसलिए आँसू सिर्फ़ पानी नहीं बल्कि बायोकेमिकल सिग्नल हैं जो स्ट्रेस को बैलेंस करने और दिखावे से अलग सच्ची vulnerability दिखाने में मदद करते हैं; रिसर्च बताती है कि "Humans are the only species whose tears are emotionally triggered," और लैक्रिमल ग्लैंड व नर्वस-सिस्टम मिलकर हार्ट-रेट, सांस और parasympathetic calm को प्रभावित करते हैं — मतलब रोना जैविक रूप से आराम देने के साथ सामाजिक रूप से empathy और connection भी पैदा करता है; कई धर्मों में सच्चे आँसू को पश्चाताप या भक्ति का सुयोग माना जाता है, पर दिखावे वाले आँसू किसी भी नैतिकता के पक्ष में नहीं होते — इसलिए अगली बार जब आँसू आएँ तो समझिए कि वह शरीर, सोच और समाज तीनों के लिए काम कर रहा है। 😢🧠❤️🔬 #रोना #आँसू #Tears #Emotions #Science #मानवता
@रोनाल्डो ठाकुर @रोनक @ रोनक @रोनी @रोशना दिपक आढाव #रोना #रोना ना कभी #अगर मैं मर जाऊं तो तुम रोना मत😭😭... #अधूरा प्यार जब तुमको हमसे प्यार नहीं तुम दिल दे बैठे और कहीं जुदा तो हमें होना है हमें तो अब रोना हम #कोरोना का रोना🤣


