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news paper - பங்ச प्रोजेक्ट रीबर्थ' को जेम्स डायसन रीबर्थ  से अलग हे जेम्स रिवर्स थ्रस्ट एक्टिवेटेडः यानी विमान को पीष्ठे प्रोजेक्ट  अवॉर्ड के लिए फाइनल लिस्ट में चुना गया है। रीबर्थ को जेम्स को दिशा में रोकन काक्ाम महिलाओं में देर रात सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग से बढ़ रहा तनाव, बिगड़ रही नींद की गुणवत्ता , घेर रही बीमारियांरिसर्च भास्कर न्यूज | अलीगढ स्क्रीन की रोशनी का मस्तिष्क पर असर, बिगड़ती है नींद की रिद्म देर रात सोशल इस्तेमाल मीडिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल 0 नींद की गुणवत्ता fs  8/ को मीडिया दिमाग को ज्यादा सक्रिय बनाए इससे तनाव, चिंता और ब्लड प्रेशर की रखता है। इससे नींद देर से आती है। शरीर अनियमितता जैसी समस्याएं तेजी से बढ की प्राकृतिक सर्कैडियन रिद्म बिगड़ जाती  8/ 46 असर महिलाओं में पुरुषों है। स्क्रीन की नीली रोशनी और ऑनलाइन की तुलना में ज्यादा पाया गया। अलीगढ़ कंटेंट का भावनात्मक उतार चढ़ाव मस्तिष्क मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में को शांत नहीं होने देता। यह बात सामने आई है। अध्ययन 24 सोशल मीडिया पर सक्रिय  ম 29  নণ ৯ লী্ণী ৭ং ন্িমা महिलाओं ने किया ज्यादा इस्तेमालः गया। থা| 80% ल शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को तीन समूहों  को मानसिक तनाव, ७०% को हाई बीपी ' अध्ययन में महिलाओं की पुरुषों স নামা और ८०% को अनियमित हृदयगति की सोशल   मीडिया = ব্ুলনা ज्यादा क पहला समूह एन१ः जो 0 से 2 घंटे समस्या रही। इस्तेमाल किया। उनमें तनाव और हृदय- सोशल मीडिया का उपयोग करता ' तीसरा समूह एन३ः जो 4 से 6 घंटे अनियमितताएं अधिक की था। रक्तचाप दबाव   हार्मोनल सोशल मीडिया पर रहता था।ये छात्र रात इनमें से केवल ३०% को तनाव, चिंता या सामाजिक UIక   7s1 बदलाव और अधिक ऑनलाइन सक्रियता अवसाद के लक्षण दिखे। इनकी हृदयगति २ से 4 बजे तक स्क्रॉल करते थे। 9१% ज्यादा संवेदनशील बना महिलाओं को और ब्लड प्रेशर सामान्य रहा। को गंभीर मानसिक तनाव और लगभग देते हैं। सभी को असामान्य स्वास्थ्य संकेत मिले। दूसरा   समूह एन२ः 2 से 4 घंटे பங்ச प्रोजेक्ट रीबर्थ' को जेम्स डायसन रीबर्थ  से अलग हे जेम्स रिवर्स थ्रस्ट एक्टिवेटेडः यानी विमान को पीष्ठे प्रोजेक्ट  अवॉर्ड के लिए फाइनल लिस्ट में चुना गया है। रीबर्थ को जेम्स को दिशा में रोकन काक्ाम महिलाओं में देर रात सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग से बढ़ रहा तनाव, बिगड़ रही नींद की गुणवत्ता , घेर रही बीमारियांरिसर्च भास्कर न्यूज | अलीगढ स्क्रीन की रोशनी का मस्तिष्क पर असर, बिगड़ती है नींद की रिद्म देर रात सोशल इस्तेमाल मीडिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल 0 नींद की गुणवत्ता fs  8/ को मीडिया दिमाग को ज्यादा सक्रिय बनाए इससे तनाव, चिंता और ब्लड प्रेशर की रखता है। इससे नींद देर से आती है। शरीर अनियमितता जैसी समस्याएं तेजी से बढ की प्राकृतिक सर्कैडियन रिद्म बिगड़ जाती  8/ 46 असर महिलाओं में पुरुषों है। स्क्रीन की नीली रोशनी और ऑनलाइन की तुलना में ज्यादा पाया गया। अलीगढ़ कंटेंट का भावनात्मक उतार चढ़ाव मस्तिष्क मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में को शांत नहीं होने देता। यह बात सामने आई है। अध्ययन 24 सोशल मीडिया पर सक्रिय  ম 29  নণ ৯ লী্ণী ৭ং ন্িমা महिलाओं ने किया ज्यादा इस्तेमालः गया। থা| 80% ल शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को तीन समूहों  को मानसिक तनाव, ७०% को हाई बीपी ' अध्ययन में महिलाओं की पुरुषों স নামা और ८०% को अनियमित हृदयगति की सोशल   मीडिया = ব্ুলনা ज्यादा क पहला समूह एन१ः जो 0 से 2 घंटे समस्या रही। इस्तेमाल किया। उनमें तनाव और हृदय- सोशल मीडिया का उपयोग करता ' तीसरा समूह एन३ः जो 4 से 6 घंटे अनियमितताएं अधिक की था। रक्तचाप दबाव   हार्मोनल सोशल मीडिया पर रहता था।ये छात्र रात इनमें से केवल ३०% को तनाव, चिंता या सामाजिक UIక   7s1 बदलाव और अधिक ऑनलाइन सक्रियता अवसाद के लक्षण दिखे। इनकी हृदयगति २ से 4 बजे तक स्क्रॉल करते थे। 9१% ज्यादा संवेदनशील बना महिलाओं को और ब्लड प्रेशर सामान्य रहा। को गंभीर मानसिक तनाव और लगभग देते हैं। सभी को असामान्य स्वास्थ्य संकेत मिले। दूसरा   समूह एन२ः 2 से 4 घंटे - ShareChat