ShareChat
click to see wallet page
search
#मेरी हृदय मेरी माँ #आध्यात्मिक दृष्टिकोण #आध्यात्मिक रचना
मेरी हृदय मेरी माँ - भय से भटकते हुए मनुष्य को भय से ग्रस्त मन से दिशा बोध को समाप्त कर देता है जिसके कारण मनुष्य सही गलत उचित अनुचित का अन्तर धुंधला दिखलाई এভন लगता है और शरीर भी इस मानसिक अशांति का दंश झेलते हुए कंपन्न कमजोरी बेचैनी जैसे स्थितियों में पड़कर दिखने लगता ೯! भय से भटकते हुए मनुष्य को भय से ग्रस्त मन से दिशा बोध को समाप्त कर देता है जिसके कारण मनुष्य सही गलत उचित अनुचित का अन्तर धुंधला दिखलाई এভন लगता है और शरीर भी इस मानसिक अशांति का दंश झेलते हुए कंपन्न कमजोरी बेचैनी जैसे स्थितियों में पड़कर दिखने लगता ೯! - ShareChat