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आलू: धरती का सोना 🥔 — “छोटी सी गुठली, बड़ी कहानी” — दक्षिणी पेरू/उत्तरी बोलीविया के आसपास 7,000–10,000 साल पहले पाले गए यह टैबर (tuber) वास्तव में जड़ नहीं बल्कि घना तना है, जिसने इंसानों के लिए तेज़ी से कैलोरी-स्रोत बनकर दुनिया बदल दी; यह वैज्ञानिक/genetic अध्ययनों से पता चलता है कि आधुनिक आलू का एक मूलस्थान रहा है। वैज्ञानिक कारण: ट्यूबर स्टोर-ऑर्गेन है जो जमाने के दौरान स्टार्च जमा करता है, और उजाला लगने पर त्वचा हरी होकर सोलानिन जैसी glycoalkaloids बढ़ाती है — इसलिए हरे हिस्से से विषाक्तता का खतरा बनता है (काट-छिलाई और उम्र बढ़ने से भी स्तर बढ़ते हैं)। व्यावहारिक नीति: जब आलू का स्वाद या रंग अलग लगे, तो रसायनात्मक सुरक्षा के कारण उन हिस्सों को हटाएं या न खाएं — यही तर्क-आधारित रास्ता है। आज वैश्विक उत्पादन करोड़ों टन में है (2023 में ~383 मिलियन टन), इसलिए यही छोटा-सा तना विश्व खाद्य सुरक्षा में बड़ा खिलाड़ी है — इतिहास, विज्ञान और पोषण का संगम। #आलू #Potato #FoodScience 🧪 #History 🗺️ #HealthTips 🥗 @potato @Probably @sweet potato @Aaloo Potato @Chilly Potato #Probably potato #काले काले जामुन #गर्मा गर्म गुलाब जामुन भेजे #गुलाब जामुन भेजे है #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰
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