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#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधिअधूरा ज्ञान खतरनाक क्या आपके धर्म गुरु जानते हैं कि विष्णु पुराण के तृतीय अंश, अध्याय 15 श्लोक 55-56 के अनुसार एक योगी (शास्त्र अनुकूल भक्ति करने वाला साधक) को भोजन कराना हज़ार ब्राह्मणों के श्राद्ध भोज से उत्तम है। #श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि - শুরলীণ সমা ৩ दोहित्र   (लडकीका  वित्राणि दाहित्रः कुतपस्तिलाः  ) 5 (14க1 आठवां मर्त ) ओर तिल-यैे तोन तया चौदीका दान दानं कथासंकोर्तनादिकम् II ५२  সাে_বমনধী_শাননীন सव  शरारूकालमे  al ಗ ಖ ausu Tೆ mrl पविप्र माने गपे ४।५२।ऐ रजेन्द। नरक्तकि लिपे  कोप॰ मार्गगमन ओर उतारलापन पे तोन नात चजित राजेन्द्र त्रयमेतनन   शस्यते ।। ५३ तया शरारमे भोजन फाेवालौको भी॰उन तीनौका িনমেথা 791 करना उचित नही ह।५३। मातामहा गते पुंसां सर्व श्राद्धं प्रकुर्वताम् । ५४  रजन। श्रार करेवले  শিষশশযণ  परुपसे  पितगण मातामह तचा कुटम्योजन - सभी सन्तुष्ट ते  वर्तमान में योगाधारश्च चन्दमाः  तगणो & I14*41 ৮ সুপালে| পিনযণকচা সাখা ধন্সা ৪ আা नयोगस्त तस्माखूपाल शस्यते ।१ ५५  चन्दमाका आधार योग 6 उसतिये शरारमे पोगिगनको संत रामपाल जी महरण निपुक्त करना अति ठत्तम ऐ। ५५ १ हे णजन्। चटि श्रारभोजों  स्थितः   चेत्पुरतः विप्राणा योगी  एक सहस्न चासणाके सम्मुठ एक योगी भी॰ठोतो बह के सभी शिष्य योगी हैं तारयति यजमानं तथा नप।। ५६  पजमानके सरित उन सयका उखार कर देता ठ।५६ ।।  T  ifuguo   ೊiqJ7 T mis!n: I (4 7 शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना ण करते हैं। विष्णु पुराण के तीसरे श्री संत रामपाल जी के सानिध्य में अंश के अध्याय १५ श्लोक हर 2 ३ महीने में भंडारे होते 55 - 56 ٦٢ लिखा है कि श्राद्ध के भोज हैं जहाँ सभी योगिजन भंडारा में यदि एक योगी यानि खाते हैं जो व्यक्ति उस भंडारे में शास्त्रोक्त साधक को भोजन নান কংনা ৪ ভমস ওলক সরমী करवाया जाए तो वह योगी पितरों का उद्धार हा जाता है। श्राद्ध भोज में आए हजार अतः श्राद्ध करने की शास्त्र ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे अनुकूल विधि जानने के लिए परिवार सहित तथा सर्व पितरों देखिए का उद्धार कर देता है। Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel Voutube Channel @SainiRampal JiMaharaj 229  subscnbers  SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ শুরলীণ সমা ৩ दोहित्र   (लडकीका  वित्राणि दाहित्रः कुतपस्तिलाः  ) 5 (14க1 आठवां मर्त ) ओर तिल-यैे तोन तया चौदीका दान दानं कथासंकोर्तनादिकम् II ५२  সাে_বমনধী_শাননীন सव  शरारूकालमे  al ಗ ಖ ausu Tೆ mrl पविप्र माने गपे ४।५२।ऐ रजेन्द। नरक्तकि लिपे  कोप॰ मार्गगमन ओर उतारलापन पे तोन नात चजित राजेन्द्र त्रयमेतनन   शस्यते ।। ५३ तया शरारमे भोजन फाेवालौको भी॰उन तीनौका িনমেথা 791 करना उचित नही ह।५३। मातामहा गते पुंसां सर्व श्राद्धं प्रकुर्वताम् । ५४  रजन। श्रार करेवले  শিষশশযণ  परुपसे  पितगण मातामह तचा कुटम्योजन - सभी सन्तुष्ट ते  वर्तमान में योगाधारश्च चन्दमाः  तगणो & I14*41 ৮ সুপালে| পিনযণকচা সাখা ধন্সা ৪ আা नयोगस्त तस्माखूपाल शस्यते ।१ ५५  चन्दमाका आधार योग 6 उसतिये शरारमे पोगिगनको संत रामपाल जी महरण निपुक्त करना अति ठत्तम ऐ। ५५ १ हे णजन्। चटि श्रारभोजों  स्थितः   चेत्पुरतः विप्राणा योगी  एक सहस्न चासणाके सम्मुठ एक योगी भी॰ठोतो बह के सभी शिष्य योगी हैं तारयति यजमानं तथा नप।। ५६  पजमानके सरित उन सयका उखार कर देता ठ।५६ ।।  T  ifuguo   ೊiqJ7 T mis!n: I (4 7 शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना ण करते हैं। विष्णु पुराण के तीसरे श्री संत रामपाल जी के सानिध्य में अंश के अध्याय १५ श्लोक हर 2 ३ महीने में भंडारे होते 55 - 56 ٦٢ लिखा है कि श्राद्ध के भोज हैं जहाँ सभी योगिजन भंडारा में यदि एक योगी यानि खाते हैं जो व्यक्ति उस भंडारे में शास्त्रोक्त साधक को भोजन নান কংনা ৪ ভমস ওলক সরমী करवाया जाए तो वह योगी पितरों का उद्धार हा जाता है। श्राद्ध भोज में आए हजार अतः श्राद्ध करने की शास्त्र ब्राह्मणों तथा यजमान के पूरे अनुकूल विधि जानने के लिए परिवार सहित तथा सर्व पितरों देखिए का उद्धार कर देता है। Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel Voutube Channel @SainiRampal JiMaharaj 229  subscnbers  SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat