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#मेरी कविता
मेरी कविता - एकांत कमरे में बैठी; कुछ यूं ही गुनगुना रही थी॰.. एक हल्का ठंडा एहसास हुआ; ऐसा एहसास एक के भूल गई,क्या गुनगुना रही थी??? खुद ही बढ् गए कदम और बस चलती जा रही थी॰.. ठहर गई आंगन में ; छज्जे से यूं छिपते हुए बादलों को निहार रहीँ थी.. अजीब से उमंग उठी मन में दौड़ पड़ी सीढ़ियों पर अनजान अभिलाषा के साथः बिन बात मुस्कुरा रही थी॰॰. एक एक सीढ़ियों को পীষ্ট তীভ,য उत्तेजना और चंचलता; के वेग में   चलती जा रही थी WTuT सहसा थम दूसरा कदमः पहले कदम आखिरी सीढ़ी ப को पार की; सकारात्मकता से भर उठी आंखे मेरी मालूम हुआ जब; ही है जो मुझे . प्रकृति अपनी ओर आकर्षित कर रही থী... पेड़ पौधे एक ही धुन में गा रहे पंछियों का संगीत समारोहः वातावरण को স্রুথনাল; बना रही प्रकृति के इस सुन्दर संसार में; मैं भी इनके स्दैथों सूमऔहीनथही  न किसी वादियों किसी पहाड़ी पर मैं थी अपने घर के छत पर प्रकृति का ये और अनाख दृश्य देख रही थी॰॰. Rigomishro एकांत कमरे में बैठी; कुछ यूं ही गुनगुना रही थी॰.. एक हल्का ठंडा एहसास हुआ; ऐसा एहसास एक के भूल गई,क्या गुनगुना रही थी??? खुद ही बढ् गए कदम और बस चलती जा रही थी॰.. ठहर गई आंगन में ; छज्जे से यूं छिपते हुए बादलों को निहार रहीँ थी.. अजीब से उमंग उठी मन में दौड़ पड़ी सीढ़ियों पर अनजान अभिलाषा के साथः बिन बात मुस्कुरा रही थी॰॰. एक एक सीढ़ियों को পীষ্ট তীভ,য उत्तेजना और चंचलता; के वेग में   चलती जा रही थी WTuT सहसा थम दूसरा कदमः पहले कदम आखिरी सीढ़ी ப को पार की; सकारात्मकता से भर उठी आंखे मेरी मालूम हुआ जब; ही है जो मुझे . प्रकृति अपनी ओर आकर्षित कर रही থী... पेड़ पौधे एक ही धुन में गा रहे पंछियों का संगीत समारोहः वातावरण को স্রুথনাল; बना रही प्रकृति के इस सुन्दर संसार में; मैं भी इनके स्दैथों सूमऔहीनथही  न किसी वादियों किसी पहाड़ी पर मैं थी अपने घर के छत पर प्रकृति का ये और अनाख दृश्य देख रही थी॰॰. Rigomishro - ShareChat