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#realty of my life
realty of my life - ज़िन्दगी की दौड़ में , तजुरबा कच्चा ही रह गया... | हम सीख न पाये फ़रेब ' और दील बच्चा ही रह गया... | बचपन में जहाँ चाहा हंस लेते थे, जहाँ चाहा रो लेते थे... | पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आँसुओं को तन्हाई .०. | हमभी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से देखा है आज ख़ुद को कुछ पुरानी तस्वीरों मैं . चलो मुस्कुराने की वजह ढुढते है ,हम तुम्हें ढूँढते है . तुम हमें ढूँढो ೩oa / u ज़िन्दगी की दौड़ में , तजुरबा कच्चा ही रह गया... | हम सीख न पाये फ़रेब ' और दील बच्चा ही रह गया... | बचपन में जहाँ चाहा हंस लेते थे, जहाँ चाहा रो लेते थे... | पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आँसुओं को तन्हाई .०. | हमभी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ से देखा है आज ख़ुद को कुछ पुरानी तस्वीरों मैं . चलो मुस्कुराने की वजह ढुढते है ,हम तुम्हें ढूँढते है . तुम हमें ढूँढो ೩oa / u - ShareChat