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#Reality Of Life
Reality Of Life - पता नहीं कब हम इतने बड़े हुए कि किताब की जगह घर की जिम्मेदारियाँ उठाने लगे खुद को काम में झोक कर अपने मन को भूलाने लगे अपनी जिम्मेदारियों का खेल हम सबको दिखाने लगे फिर कभी टाइम निकालेंगे ऐसा बोल खुद को रिझाने लगे पता ही नहीं चला कि कब हम खुद का ही म्रज़ाक बनाने लगे पता नहीं कब हम इतने बड़े हुए कि किताब की जगह घर की जिम्मेदारियाँ उठाने लगे खुद को काम में झोक कर अपने मन को भूलाने लगे अपनी जिम्मेदारियों का खेल हम सबको दिखाने लगे फिर कभी टाइम निकालेंगे ऐसा बोल खुद को रिझाने लगे पता ही नहीं चला कि कब हम खुद का ही म्रज़ाक बनाने लगे - ShareChat