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महाराष्ट्र निकाय चुनाव राज ठाकरे के कारण दांव पर लगी एमवीए की एकजुटता कांग्रेस-उद्धव के बीच फिर बयानबाजी आज जो देश में कांग्रेस की दूर्गति हुई है वह किसी और के कारण नही बल्कि खुद की दोगली नीतियों के चलते ही हुई है। कांग्रेस इन दिनों कमजोर होने के कारण दूसरे दलों के सहारे सशक्त तो होना चाहती है मगर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करके। जबकि कांग्रेस के राज्यों की इकाईयों के प्रमुखों और इसके आला नेताओं को अच्छे से मालूम है कि इन दिनों कांग्रेस का कोई पूछनहारा नही है, बावजूद इसके वह अपने दोगलेपन से बाज नही आती है। यहां कांग्रेस के दोगलेपन की बात महाराष्ट्र निकाय चुनाव के संदर्भ में की जा रही है। एक बार फिर कांग्रेस की चालबाजियों के चलते महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की एकजुटता दांव पर लग गई है। माना कि कांग्रेस राज ठाकरे को एमवीए में शामिल करना नहीं चाहती है ये अच्छी बात भी है हिंसा के प्रतीक राज ठाकरे को इससे दूर ही रखा जाए पर ये क्या बात हुई कि कुछ भी बयानबाजी करके दुश्मन को ताकत प्रदान करना और अपने ही सहयोगियों का मनोबल कमजोर करना। ऐसा इसलिए कह रहे है क्योंकि मुंबई में कांग्रेस ने ये घोषणा कर दी है कि निकाय चुनाव वह अकेले लडऩे जा रही है। कांग्रेस के इस बयान से शिवसेना यूबीटी यानी उद्धव ठाकरे ग्रुप की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। मतलब साफ है कि कांग्रेस की इस दगाबाजी के चलते एक बार फिर इंडिया गठबंधन में महाराष्ट्र में दरार पड़ेगी। बताते है कि कांग्रेस ने एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुंबई के पूर्व अध्यक्ष भाई जगताप ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस आगामी नागरिक चुनावों में राज ठाकरे के साथ गठबंधन नहीं करेगी। न ही यह उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी, बल्कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही जगताप ने कहा कि इस मुद्दे पर हाल ही में महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला के साथ एक नई समिति की बैठक में चर्चा हुई थी। हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। पर ये सच है कि नई समिति भी अलग चुनाव लडऩे के पक्ष में है। शिवसेना यूबीटी नेता आनंद दुबे ने भाई जगताप के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि गठबंधन का फैसला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खडग़े और शिवसेना के उद्धव ठाकरे लेंगे। हमें चुनौती न दें। हम शिवसेना हैं और पिछले चुनाव में हमने अकेले लडक़र बीजेपी को हराया था। हम अपने गठबंधन साझेदारों का सम्मान करते हैं, लेकिन अकेले चुनाव लडऩे के लिए भी तैयार हैं। इस बीच मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने भीा हमला बोल दिया। वर्षा ने राज ठाकरे पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान या कानून का सम्मान न करने वालों के साथ नहीं खड़ी होगी। यह बयान तब आया जब एनसीपी (एसपी) ने एमएनएस को शामिल करने पर खुलापन दिखाया। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि राज की एंट्री अवांछित है। इससे एमवीए में तनाव और बढ़ गया है। आपको बता दे कि कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी 2019 से सहयोगी रही हैं। यह गठबंधन राष्ट्रवादी कांग्रेस प्रमुख शरद पवार द्वारा बनाया गया था, जो उनकी विरोधी विचारधाराओं के बावजूद समय और कई उतार-चढ़ावों की कसौटी पर खरा उतरा है। लेकिन उद्धव ठाकरे के अपने अलग हुए चचेरे भाई राज ठाकरे के फिर से करीब आने के साथ, राज ठाकरे को इस समीकरण में शामिल करना एक चुनौतीपूर्ण संभावना हो सकती है। ठाकरे चचेरे भाइयों के बीच कथित तौर पर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव से पहले समझौता करने की इच्छा है, जो एशिया का सबसे अमीर नागरिक निकाय माना जाता है। बहरहाल, महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के अन्य सहयोगी शरद पवार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, ना ही अभी कोई आपत्ति जताई है क्योंकि दोनों क्षेत्रीय दल हैं। हालाकि इस संबंध में शरद पवार की प्रतिक्रिया अहम होगी। मतलब कह सकते है कि इस टूट का कारण या मुख्य वजह राज ठाकरे ही है। अक्टूबर 2025 की शुरुआत से ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच संबंधों में सुधार देखा गया। 5-6 अक्टूबर को दोनों की मुलाकात के बाद शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने संकेत दिया कि सेना-एमएनएस गठबंधन पर चर्चा चल रही है। राउत ने कहा कि राज ठाकरे चाहते हैं कि कांग्रेस को भी साथ लिया जाए, और एमवीए में एमएनएस की एंट्री संभव है। 14 अक्टूबर को राज ठाकरे ने पहली बार एमवीए नेताओं (उद्धव, शरद पवार ) के साथ राज्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की, जहां मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए। इससे एमएनएस की एमवीए में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। इस बीच कांग्रेस ने राज ठाकरे के एमएनएस को एमवीए में शामिल करने का विरोध शुरू कर दिया। 16 अक्टूबर को महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने कहा कि एमएनएस के साथ गठबंधन का फैसला स्थानीय स्तर पर होगा, और उन्हें कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। हर्षवर्धन ने जोर दिया कि इंडिया ब्लॉक के मूल्यों जैसे संवैधानिक मूल्य और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों के आधार पर ही एंट्री संभव है । मजेदार बात तो ये है कि विपक्षी गठबंधन की यह दरार बीजेपी के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजेपी विधायक राम कदम ने एमवीए को केवल नाम का गठबंधन करार दिया है। #❤️जीवन की सीख
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